येदियुरप्‍पा ने राज्‍यपाल को सौंपा इस्तीफा, कांग्रेस-JDS का रास्ता साफ

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बेंगलुरु। कर्नाटक में भाजपा की येदियुरप्पा सरकार ढाई दिन बाद गिर गई है। राज्य विधानसभा में बीजेपी के मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा का बहुमत परीक्षण होना था और इससे पहले एक बेहद भावुक भाषण के बाद येदियुरप्पा ने विधानसभा में अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि में बहुमत परीक्षण को आगे नहीं बढ़ाते हुए इस्तीफा देता हूं और राज्यपाल से मिलकर इस्तीफा सौंप दूंगा। उनके इस्तीफे के बाद अब राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए प्रस्ताव सदन में रखा। इस दौरान सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों ने हमें बड़े प्यार से चुना है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। मेरे पास 104 विधायक हैं जबकि कांग्रेस और जेडीएस को बहुमत नहीं मिला। चुनाव में हारने के बाद मौका देखकर गठबंधन किया। उनका यह गठबंधन अवसरवादी। चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी होने की वजह से मुझे सरकार बनाने का आमंत्रण दिया। राज्य में 3700 किसानों ने आत्महत्या की है। लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। मैं जब तक जिंदा हूं किसानों के लिए काम करूंगा। कर्नाटक में किसान आंसू बहा रहे हैं। जब वो तकलीफ में थे तब मैं उनके आंसू पोछने गया। मैं दो साल तक राज्य में घूमा और खुद लोगों की तकलीफ देखी। मैं उस प्यार को नहीं भूल सकता जो लोगों ने मुझे दिया। मेरे सामने आज अग्निपरीक्षा है और यह मेरे लिए नया नहीं है। मैं जिंदगीभर जंग लड़ता रहूंगा। राज्य में कभी भी चुनाव आ सकता है और मैं फिर जीतकर आऊंगा। मेरे पास 113 सीट होती तो तस्वीर अलग होती। येदियुरप्पा के बहुमत प्रस्ताव के लिए दर्शक दिर्घा में भाजपा और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। कांग्रेस के विधायक विधानसभा पहुंचे हैं और शपथ ग्रहण करेंगे। कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा कि हमारे विधायक हमारे साथ हैं और हमें ही वोट देंगे। सदन में लंच के दौरान सभी कांग्रेस विधायक विधानसभा से बाहर नहीं निकले और उन्होंने वहीं पर लंच किया। कांग्रेस के दो विधायक आनंद सिंह और प्रताप गौड़ा सदन में शपथ ग्रहण के लिए नहीं पहुंचे कुछ देर बाद यह दोनों विधायक बेंगलुरु के गोल्डफिंच होटल में मिले जहां से उन्हें निकाला गया। वहीं भाजपा के एक विधायक सोमशेखर रेड्डी भी सदन से लापता थे इन्ही के साथ थे। कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने भाजपा पर अपने विधायकों को बंधक बनाने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की वो याचिका खारिज कर दी जिसमें प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में प्रोटेम स्पीकर पर कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुनवाई हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को झटका देते हुए कहा कि वो राज्यपाल के फैसले को नहीं बदल सकती और वो भाजपा का ही रहेगा। इसके अलावा कोर्ट ने बहुमत परीक्षण के दौरान इसका लोकल चैनल्स पर लाइव प्रसारण करने के निर्देश भी दिए हैं।
2010 में बोपैया ने बचाई थी येदियुरप्पा की सरकार
राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा के वरिष्ठ नेता केजी बोपैया को विस का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। उन्होंने स्पीकर रहते हुए 2010 में 16 विधायकों को अयोग्य घोषित कर येदियुरप्पा सरकार बचाई थी। यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। तब कोर्ट ने उसके खिलाफ कठोर टिप्पणियां की थीं। इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने शुक्रवार शाम फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। मामले की अर्जेंट सुनवाई का आग्रह किया गया है।

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