नाटक करते जवां हुई दो हिंदू-मुस्लिम कैदियों की मोहब्बत, मर्डर की काट रहे हैं सजा, दोनों ने रचाई दूसरी शादी

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नोबल साहित्य पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टेगौर के नाटक का रिहर्सल करते वक्त बुद्धादेब और रूना बीबी को एक दूसरे से मोहब्बत हो गई। जिसके बाद हिंदू युवक और मुस्लिम महिला ने मंगलवार को स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 ने शादी कर ली। दोनों की लव स्टोरी कोई सामान्य नहीं है। दोनों ही हत्या के दोषी हैं और अभी बेरहमपुर केंद्रीय सुधार गृह में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैँ।बीरभूम के रहने वाले 38 वर्षीय बुद्धादेब ने एक आदमी को पीट-पीटकर तब मार दिया था, जब वह आदमी बुद्दादेब के पिता के साथ मारपीट कर रहा था। वहीं मुर्शिदाबाद की रहने वाली रूना बीबी ने अपनी शादी के दो महीने बाद ही जेठ की बेटी की साल 2004 में हत्या कर दी थी। जब उसकी शादी की गई थी तो उसकी उम्र मात्र 13 साल थी।उसके बाद ससुराल ने उसके बाद उन्हें छोड़ दिया था। उनके पेरेंट्स गरीब थे, इसलिए वे वकील नहीं कर पाए कि ताकि वे जुविनाइल जस्टिस बोर्ड में केस को शिफ्ट करा पाएं। जब उसे दोषी ठहराया गया तो उसके पति ने तलाक दे दिया।बुद्धादेब ने भी पहले शादी की थी, उनकी पत्नी भी उसे हत्या के बाद छोड़कर चली गई थीं। दोनों की मुलाकात कुछ साल पहले तब मिले जब वे प्रदीप भट्टाचार्य के निर्देशन वाले नाटक में अभिनय कर रहे थे। उन्होंने नाटक के लिए भट्टाचार्य के साथ पूरे देश में कई शहरों की यात्रा की है।

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