प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय जाने पर कांग्रेस में उठे सवाल, पार्टी ने साधी चुप्पी

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। खुद कांग्रेस के अंदर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के निमंत्रण के स्वीकार करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, पार्टी अधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने मंगलवार को कहा कि मीडिया के जरिए यह पता चला है कि इस तरह का कोई निमंत्रण आया है। अभी कार्यक्रम नहीं हुआ है, इसलिए वह इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। जहां तक पार्टी की विचारधारा का प्रश्न है, हमारी और उनकी विचारधारा में बहुत फर्क है। कांग्रेस ने कभी अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया है।अधिकारिक तौर पर पार्टी की चुप्पी के बावजूद संदीप दीक्षित कई सवाल उठा रहे हैं। दीक्षित का कहना है कि वह प्रणब मुखर्जी को काफी लंबे अरसे से जानते हैं। उन्होंने खंघ के बारे में उनके विचार भी सुने हैं। पूर्व राष्ट्रपति संघ के कार्यक्रम में जा रहे हैं, तो क्या वह आरएसएस के बारे में अपनी राय बताएगें। क्या आरएसएस में बदलाव आया है। संघ ने कार्यक्रम में एक ऐसे व्यक्ति को आमंत्रित किया है,जो उनके बारे में यह विचार रखता है।संदीप दीक्षित ने कहा कि आरएसएस और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के व्यक्तित्व में काफी अंतर है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि संघ के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी क्या कहेंगे। दीक्षित नहीं पार्टी के दूसरे नेता भी प्रणब मुखर्जी के आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने को लेकर अचंभित है। वह कहते हैं कि वर्ष 1976-77 और बाबरी मसजिद विध्वंस के बाद आरएसएस पर पाबंदी लगाई गई, उस वक्त प्रणब मुखर्जी सरकार का हिस्सा थे। ऐेसे में वह किसी ऐसी संस्था के मुख्यालय कैसे जा सकते हैं, जिस संस्था पर उन्होंने दो बार पाबंदी लगाई हो।

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