राहतः दिल्ली में आज हो सकती है बारिश, शाम तक तूफान भी संभव, जानें कब कहां पहुंचेगा मानसून

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केरल में मानसून पहुंचते ही उत्तर भारत में भी सबको गर्मी से थोड़ी राहत की आस दिखने लगी। मौसम विभाग के अनुसार आज (बुधवार) दिल्ली में बारिश होने की उम्मीद है। इससे दिल्लीवासियों को गर्मी से राहत मिल सकती है। इसके अलावा आज शाम तक तूफान या धूलभरी आंधी भी चल सकती है।
अगर मंगलवार की बात करें तो दिल्ली का अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस रहा। पालम इलाके में अधिकतम तामपान 44.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हवा में आर्द्रता का न्यूनतम स्तर 19% रहा। .मौसम वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के ऊपर बने हवाओं के चक्रवात के चलते दिल्ली में बुधवार को हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। दोपहर में आसमान में बादल रहेंगे और धूलभरी आंधी भी चल सकती है। इससे गर्मी से मामूली राहत मिल सकती है। अधिकतम तापमान 43 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री रह सकता है।
दिल्ली में समय से पहले आएगा मानसून
मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने बताया कि दिल्ली में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि 29 जून है। केरल में मानसून पहुंचने के 30 दिनों के भीतर मानसून दिल्ली पहुंचता है। चूंकि केरल में इस बार यह तीन दिन जल्दी पहुंचा है, इसलिए उम्मीद है कि तय समय से पहले मानसून दिल्ली और उत्तर भारत के हिस्सों में दस्तक दे देगा। .
मानसून की रफ्तार
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की रफ्तार अच्छी है। केरल स्थित 14 बारिश रिकॉर्डिंग केंद्रों में से 60 फीसदी में पिछले तीन-चार दिनों में बारिश हुई है, जो मानसून के अच्छे होने का पैमाना है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो इसकी वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी पर बनी दो मौसम प्रणालियां है।
मौसम विज्ञानियों ने कहा, 25 मई को अंडमान पहुंचने के बाद मानसून ने रफ्तार पकड़ी। इसकी वजह दक्षिण पूर्व अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनना है। कुछ इसी तरह की स्थिति बंगाल की खाड़ी में बनी हुई है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून के पश्चिमी धड़े के आगे बढ़ने में अरब सागर पर बना कम दबाव क्षेत्र अहम भूमिका निभा रहा है। यही वजह है कि मानसून ने सामान्य से तीन दिन पहले ही केरल में दस्तक दे दी। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र मानसून के पूर्वी हिस्से को गति देगा, जिससे पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, बिहार-झारखंड के हिस्सों में बारिश होती है।
अर्थव्यवस्था को फायदा
यह लगातार तीसरा साल है जब मानसून के सामान्य रहने की भविष्यवाणी की गई है। देश में करीब 60-65 फीसदी खेती अभी भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है। इसलिए आम चुनावों से ठीक पहले साल में सामान्य मानसूनी बारिश की भविष्यवाणी सरकार को भी राहत पहुंचाने वाली है। अच्छे खाद्यान्न उत्पादन से जहां किसानों की आय में इजाफा होगा वहीं अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकेगी। इसके अलावा नदियों, तालाबों में पानी की कमी दूर होती है। भूजल स्तर भी बढ़ेगा। बारिश होगी तो गर्मी की चुभन से भी राहत मिलेगी।
मानसून मुंबई पहुंचेगा, तभी उत्तर भारत को तपिश से राहत
केरल में दस्तक देने के करीब दस दिन मानसून मुंबई में दस्तक देता है। लेकिन इसका इंतजार उत्तर भारतीयों को अधिक होती है, क्योंकि मुंबई में मानसून की फुहारों के साथ उत्तर भारत के इलाकों के अधिकतम तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है।
करीबी रिश्ता
– मुंबई में मानसून पहुंचने के साथ ही उत्तर भारत में अधिकतम तापमान में गिरावट आने लगती
– 10 जून को मुंबई में मानसून की बारिश शुरू होने के साथ दिल्ली का पारा 38 के आसपास पहुंच जाता
पूर्वानुमान
– 6 जून को मुंबई में मानसून पूर्व बरसात की शुरुआत होने की उम्मीद
-8 या 9 जून को मानसून की पहली बारिश मुंबई में हो सकती है
मानसून केरल पहुंचने का असर
– आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई इलाकों में मानसून पूर्व बारिश हो रही है।
– पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों और बांग्लादेश में भी मानसून से पहले होने वाली बारिश ने रफ्तार पकड़ी।
पहले भी मिल सकती राहत
– उत्तर भारत खासतौर पर पश्चिमोत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से मानसून पूर्व बारिश होती
– तिब्बत के पठार पर कम दबाव का क्षेत्र बनने से भी उत्तर भारत का मौसम प्रभावित होता है
इस साल मेघ होगा मेहरबान
– 97 फीसदी बारिश इस साल होने की भविष्यवाणी की गई
– 890 मिलीमीटर पूरे देश में सामान्यत: मानसून की बारिश होती
– 863 मिलीमीटर इस साल बारिश होने का अनुमान लगाया गया
– 5 फीसदी अनुमान में गणना त्रृटि होती, इसलिए बारिश 92 से 105 फीसदी संभव
आज का अनुमान
– 12 से 20 सेंटीमीटर तक केरल के कई स्थानों पर बारिश हो सकती है
– कर्नाटक और तमिलनाडु के अधिकतर हिस्से में मानसून पहुंच जाएगा
– 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से केरल के तटीय इलाकों चल सकती है हवांए
– इन इलाकों के नाविकों और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी दी गई

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