सीएम नीतीश ने मजबूती से रखा पक्ष, बताया- क्यों मिले बिहार को स्पेशल स्टेटस

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर राज्य को स्पेशल स्टेटस देने की बात की है। उन्होंने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आखिर क्यों बिहार को स्पेशल स्टेटस चाहिए?
पटना । बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जा देने के मुद्दे को फिर से हवा दे दी है और इस बार उन्होंने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए वित्त आयोग से इस बारे में पिछड़े राज्यों को विशेष दर्जा क्यों मिलना चाहिए इसपर विस्तार से अपनी बात रखी है।मंगलवार को नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पुरानी मांग को दोबारा उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। नीतीश कुमार ने मंगलवार को ब्लॉग लिखकर बिहार को किन कारणों से स्पेशल स्टेटस दिया जाना चाहिए इस बारे में विस्तार से लिखा है।नीतीश कुमार ने बिहार को स्पेशल स्टेटस देने का मुद्दा ठीक ऐसे समय उठाया है जब उन्होंने कुछ दिन पहले बिहार को बाढ़ राहत पर मिलने वाले केंद्रीय सहायता में कटौती पर एतराज जताया था और नोटबंदी के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने की बात कही थी।सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार अगले कुछ दिनों में बिहार को स्पेशल स्टेटस देने की अपनी पुरानी मांग को और जोरदार तरीके से उठाएंगे। मालूम हो कि हाल के सालों में इस मुद्दे पर बिहार में लगातार सियासत होती रही है और नीतीश कुमार ने हमेशा इस मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करने की बात कही है।2013 में एनडीए से अलग होने में यही मुद्दा तात्कालिक कारण बना था। महागठबंधन का साथ छोड़ने के बाद बीजेपी के साथ दोबारा सरकार में आए नीतीश कुमार पर राजद अपनी राजनीति के लिए इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाती रही है। ऐसे में नीतीश कुमार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए इस मुद्दे को दोबारा से उठाया है।बता दें कि अभी पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के सीएम और टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने भी इस मुद्दे पर आंदोलन किया था और एनडीए से अलग हुए थे। जदयू के सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार एनडीए में रहकर ही बिहार के हित पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। नीतीश कुमार की नाराजगी वित्त आयोग की अनुशंसा को लेकर है जिसके बारे में उनका तर्क है कि इसकी अनुशंसा से बिहार को मिलने वाली मदद में कटौती हो गई है। जेडीयू के एक सीनियर नेता के अनुसार केंद्र सरकार वित्त आयोग की अनुशंसा को इस तरह पेश कर रही है जैसे इसमें अब किसी तरह का बदलाव मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बेहतरी के लिए संविधान तक में संशोधन हो सकते हैं तो वित्त आयोग में क्यों नहीं?

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