जीरो ग्रैविटी में टॉयलेट का इस्तेमाल बुरे सपने जैसा : पेगी विटसन

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गहरे अंतरिक्ष के भेद सुलझाने वाले अंतरिक्षयात्रियों के लिए स्पेस का सफर और वहां रहना काफी रोमांचकारी होता है। इसके बावजूद एक चीज है, जिसके इस्तेमाल के बारे में सोचकर भी उनका दिल घबरा जाता है। खास बात यह है कि इसके इस्तेमाल से बचा भी नहीं जा सकता है। अंतरिक्ष में नासा के 665 दिनों के अभियान से धरती पर 3 जून को वापस लौट रहीं अंतरिक्ष यात्री पेगी विटसन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में रहने के रोमांच और चुनौतियों को एक कार्यक्रम में साझा किया। पेगी ने बताया कि उन्हें अंतरिक्ष के मिशन काफी रोमांचकारी लगते हैं। वह बार–-बार अंतरिक्ष मिशन पर जाना चाहेंगी।
बुरे सपने जैसा है टॉयलेट इस्तेमाल का अनुभव
हालांकि एक चीज है, जिसे वह धरती पर लौटने के बाद बुरे सपने की तरह भुला देना चाहती हैं। यह है उनका टॉयलेट इस्तेमाल करने का अनुभव। पेगी कहती हैं, शून्य गुरुत्वाकर्षण में सबसे मुश्किल काम है टॉयलेट का इस्तेमाल करना। आईएसएस में ग्रैविटी नहीं होती है। ऐसे में टॉयलेट इस्तेमाल करने की चुनौतियां अलग तरह की होती हैं।
2008 में आईएसएसमें लगाया गया था टॉयलेट
आईएसएस के अमेरिकी हिस्से में 2008 में टॉयलेट लगाया गया था। इसमें कुछ समय के बाद पर्दा लगाया है। यह कुछ समय के बाद भर गया था। आईएसएस के रूसी हिस्से में भी टॉयलेट है, मगर यह भी कई बार खराब हो जाता है और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है। फिर एस्ट्रोनॉट अपने शटल में जाकर अपोलो बैग (मजाक में दिया गया नाम) का इस्तेमाल करना पड़ता है। पेगी कहती हैं कि कई बार परिस्थितियां इससे भी खराब होती हैं। आईएसएस में टॉयलेट लगाने में 2 करोड़ डॉलर का खर्च आया था।
रीसाइकिल कर पीने के पानी में बदल जाती है सूसू
पेगी कहती हैं कि आईएसएस में टॉयलेट इस्तेमाल करने में सबसे ज्यादा आसान होता है नंबर एक यानी सूसू करना। इसके लिए एक फनल से लगा हुआ पाइप है और यह एक रीसाइक्लिंग सिस्टम से जुड़ा हुआ है। आठ दिनों के बाद एस्ट्रोनॉट की टॉयलेट रीसाइकिल होकर पीने के पानी में बदले जाती है।
जरा सी चूक से हो सकता है बदबूदार हादसा
मगर नंबर दो यानी पॉटी करना काफी चुनौती भरा होता है। इसके लिए आईएसएस पर लगे टॉयलेट में एक प्लास्टिक का पतला झिल्लीनुमा बैग होता है, जिसमें पॉटी करनी होती है। जरा सी असावधानी एक गंभीर और बदबूदार हादसा आईएसएस के भीतर हो सकता है। आईएसएस पर जाने वाले यात्रियों को उड़ान भरने से पहले बाकायदा टॉयलेट इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।
10 दिन में एक बार खाली होता है टॉयलेट
पेगी कहती हैं कि जीरो ग्रैविटी में मल त्याग के दौरान जरा सी चूक से अंतरिक्ष स्टेशन में गंदगी फैल सकती है, जिसे संभालना नामुमकिन होता है। बहरहाल आईएसएस के टॉयलेट में लगे बैग में मल त्याग के बाद 10 दिन में एक बार उसे खाली कर साफ करना होता है। यह रीसाइकिल नहीं होता है। इसे आईएसएस से बाहर भी फेका जा सकता है और यह धरती के वातावरण में प्रवेश करते ही जलकर राख हो जाएगा। मगर अंतरिक्ष में यूं ही कुछ भी करना मुश्किल और महंगा हो सकता है। आईएसएस का टॉयलेट जब भर जाता है तो रबर के दस्ताने पहनकर उसे सावधानीपूर्वक पैक किया जाता है। इसे आईएसएस में एक हफ्ते के दौरान जमा हुए अन्य कचरे के साथ नष्ट कर दिया जाता है।

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