शिमला में जल संकट: 30 रेस्तरां बंद, लोग बेहाल, सैलानियों से न आने को अपील की

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खूबसूरत हिल स्टेशन शिमला इन दिनों ऐतिहासिक जलसंकट का सामना कर रहा है। कई दिनों से आंदोलन कर रहे लोग बुधवार फिर लोग सड़क पर उतरे। कुछ जगहों पर जाम भी लगाकर नगर निगम व सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। बाद में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया। कई दिनों से नलों में पानी नहीं आ रहा। प्रमुख इलाकों में टैंकर से पानी भेजा जा रहा है। इन टैंकरों के आसपास लंबी-लंबी लाइन लग रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोस्टर के हिसाब से भी पानी नहीं बंट रहा। जिन इलाकों में मंगलवार को पानी की आपूर्ति की जानी थी, वहां से भी पानी की आपूर्ति नहीं की गई। पानी की कालाबाजारी और नगर निगम की लापरवाही से भी जनता में रोष है।
30 रेस्टोरेंट बंद हुए
पानी की कमी के कारण शिमला शहर के 30 रेस्टोरेंट बंद कर दिए गए हैं। इससे सैलानियों को खाने पीने में काफी परेशानी हो रही है। वहीं स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर सैलानियों से अपील कर रहे हैं कि इन गर्मियों में शिमला न आएं। शिमला के होटल एसोशिएशन के मुताबिक महंगी दर पर भी टैंकर नहीं मिल पा रहा है।
अस्पतालों पर भी असर
शिमला के अस्पतालों में भी पानी की कमी हो गई है, जिसकी वजह से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिमला के आयुर्वेदिक अस्पताल में पानी नहीं है जिसकी वजह से पंचकर्म एवं अन्य जरूरी इलाज ठप पड़ गए हैं। अन्य सरकारी अस्पतालों में भी पानी की किल्लत कर कारण मरीज भी परेशान हैं।
कहां से आता है पानी-
– 1875 में पहली बार शहर में पानी सप्लाई की व्यवस्था शुरू हुई थी।
– 15 किलोमीटर दूर गुम्मा और 7 किमी दूर अश्विनी खंड से पानी आता है।
– 16 हजार लोगों के लिए किया था पानी का इंतजाम आज आबादी 1.70 लाख हुई।
– 10 गुना से ज्यादा बढ़ गई आबादी पर पानी का इंतजाम पांच गुना भी नहीं बढ़ा।
– 20 हजार सैलानी भी हर रोज आते हैं शिमला में, होटलों के पास भी पानी की कमी है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्थिति का जायजा लिया
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पेयजल संकट हल होने तक प्रदेश का दौरा करने के बावजूद रात को हमेशा शिमला में ही रहेंगे और पानी पर अधिकारियों की बैठक लेंगे। वे बुधवार को चंबा जाने से पहले रात को शिमला आए और सुबह हालात का जायजा लिया।

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