कैराना उपुचनाव: आखिरकार हो ही गई यूपी से लोकसभा में मुस्लिम नुमाइंदगी

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मौजूदा 16 वीं लोकसभा के खत्म हो रहे कार्यकाल में आखिरकार उत्तर प्रदेश से मुस्लिम नुमाइंदगी हो ही गई। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना जा सका था। इस सन्नाटे को कैराना लोकसभा सीट जीत कर रालोद की तब्बसुम बेगम ने तोड़ दिया।हालांकि, तबस्सुम बेगम इससे पहले वर्ष 2009 में गठित 15 वीं लोकसभा में भी बतौर बसपा प्रत्याशी जीतकर कैराना की ही नुमाइदंगी कर चुकी हैं। वर्ष 1952 से लेकर अब तक जितनी भी लोकसभा गठित हुईं, उसमें से 2014 में ही ऐसा पहली बार हुआ था।मौजूदा लोकसभा में कुल 23 मुस्लिम सांसद हैं जिनमें से सर्वाधिक आठ पश्चिम बंगाल से, चार बिहार से, केरल और जम्मू कश्मीर से तीन-तीन, दो असम से, आन्ध्र प्रदेश, लक्ष्यद्वीप और तमिलनाडु से एक-एक मुस्लिम सांसद हैं। कहने को तो आबादी के लिहाज से कुल आबादी में 19 फीसदी हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला सूबा है और इसी प्रदेश में लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें भी हैं।
मगर 2014 के चुनाव कुछ ऐसी लहर चली कि यूपी से एक भी मुस्लिम जीतकर लोकसभा नहीं पहुंच पाया। सलमान खुर्शीद, मोहम्मद अदीब, क्रिकेटर मोहम्मद कैफ, जफर अली नकवी, शफीकुर्रहमान बर्क और नसीर अहमद खान जैसे दिग्गज मुस्लिम नेता 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गए थे।

वर्ष 2009 में तो प्रदेश से कुल सात मुस्लिम नुमाइंदे पहुंचे थे जिनमें कैराना से बसपा की तबस्सुम बेगम, मुजफ्फरनगर से बसपा के ही कादिर राना, मुरादाबाद से कांग्रेस के मो.अजहरुद्दीन (क्रिकेटर), सम्भल से बसपा के शफीकुर्रहमान बर्क, खीरी से कांग्रेस के जफर अली नकवी, सीतापुर से बसपा की कैसरजहां और फरूखाबाद से कांग्रेस के सलमान खुर्शीद थे। लोकसभा के इतिहास पर गौर करें तो 1980 में 7 वीं लोकसभा में देशभर से सर्वाधिक 49 मुस्लिम नुमाइंदे चुने गए थे जिनमें 85 लोकसभा सीटों वाले अविभाजित उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 18 मुस्लिम चुने गए थे।

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