U.S.- North Korea संबंधों को समझने के लिए ये 5 बातें जानना जरूरी हैं

0
85

उत्तर कोरिया और अमेरिका की बीच विदेश सचिव स्तर पर गुरुवार को ऐतिहासिक वार्ता हुई। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के विश्वासपात्र और सीनियर नेता ने अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी माइक पाइमियो से न्यू यॉर्क में मुलाकात की। हालांकि नॉर्थ कोरिया के नेता जेन किम योंग चोल ने पाइमियो के साथ फ्लाइट में चीन से अमेरिका पहुंचने की खबरों को खंडन किया।लेकिन ऐसा 20 साल बाद पहली बार हुआ है जब नॉर्थ कोरिया से कोई सीनियर अधिकारी अमेरिका पहुंचा हो। 12 जून को ट्रंप और तानाशाह किम जोंग उन के साथ होने वाली वार्ता टलने के बाद पहली बार दोनों ओर नए प्रयास किए जा रहे हैं जिससे कि पहले से तय वार्ता संपन्न हो सके।
इतिहास में पहली बार होगी दो देशों की मुलाकात-
नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब दोनों देशों के मौजूदा राष्‍ट्राध्यक्षों के बीच मुलाकात होगी। आपको बता दें दोनों शीर्ष नेताओं के बीच प्रस्तावित यह मुलाकात 12 जून को सिंगापुर में आयोजित होगी। लेकिन इस मुलाकात से पहले उन खास बातों को जानना जरूरी है जो दोनों देशों के संबंधों की पड़ताल करती हैं-
1 – नॉर्थ कोरिया की अमेरिका से कैसे शुरू हुई दुश्मनी-
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, भारत, सोवियत यूनियन और चीन को मिलकर जो संगठन बना उसके सामने जापान ने समर्ण कर दिया था। अब कोरिया महाद्वीप के दो हिस्सों में दो अलग-अलग देशों की सेनाओं का कब्जा था। नॉर्थ कोरिया रूस के कब्जे में था तो साउथ कोरिया का हिस्से में अमेरिकी सैनिकों ने कब्जा जमाया हुआ था। ऐसा अमेरिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जी योंग ली की ओर से लिखे एक लेख में कहा गया है।नॉर्थ कोरिया ने 1950 के करीब कोरिया महाद्वीप को एक में मिलाने की कोशिश की जिसके परिणाम स्वरूप 1950 में कोरिया का युद्ध हुआ जिसका चीन को पूरी तरह से समर्थन मिला हुआ था। परिणाम यह हुआ कि इस युद्ध में अमेरिका के 50 हजार सैनिकों के साथ लाखों के कोरियाई और चीनी सैनिक भी मारे गए। तब से आज तक लगातार साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं।उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का बंटवारा युद्ध के बाद आधिकारिक तौर पर 1953 में हुआ। तब से लगातार दोनों देशों की बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे। इस युद्ध में एक ही कोरिया के लोग अपनों की जान गवांने के कारण दोनों तरफ के लोगों के प्रति घृणा का भाव रखने लगे। कई परिवार और उनके रिश्तेदारों को उनके अपनों से जबरन अलग रखा गया। कहा जा रहा है कि कुछ परिवार तो दूसरे हिस्से के कोरिया में रह रहे अपनों से नहीं मिल पाए।अमेरिका से उत्तर कोरिया की दुश्मनी को लेकर एक कारण यह भी है कि 1968 में जब वियतनाम युद्ध् अपने चरम पर था, तब उत्तर कोरिया की फौज ने हमला कर अमेरिकी नैवी के खुफिया जहाज प्यूब्लो को पकड़ लिया और इसमें सवार 83 सदस्यों को कैद कर लिया। इस घटना को दुनिया ने ‘Pueblo incident’ के रूप में जाना। 11 महीने पर उत्तर कोरिया ने जब अमेरिकी जहाज को मुक्त किया तब तक कैद किए सदस्यों में से एक की मौत भी हो चुकी थी।
अमेरिका के हालिया राष्ट्रपतियों का उत्तर कोरिया को लेकर रुख-
जॉर्ज बुश से लेकर अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति की बात करें तो उत्तर कोरिया के रिश्ते उनसे बहुत अच्छे नहीं रहे। बुश ने एक बार उत्तर कोरिया को ‘शैतानों का अड्डा’ बताया था। इसके बाद बाराक ओबामा की बात करें तो उन्होंने उत्तर कोरिया के बीच अपना रुख संतुलित रखा। इसके बाद आए राष्ट्रपति ट्रंप। ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग के बीच किस तरह तीखी नो झोंक चली थी यह सबको बता है। ट्रंप ने एक बार किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा तो तानाशाह ने भी ट्रंप को भौकने वाला कुत्ता तक कह डाला था।
ट्रंप ने अमेरिका की सत्ता संभालने के साथ ही उत्तर कोरिया को लेकर भड़काऊ बयानबाजी करने लगे थे। एक बार ट्रंप ने यहां तक कहा था कि उत्तर कोरिया अमेरिका को ज्यादा धमकी न दे, नहीं तो उन्हें ऐसी आग और तबाही देखने को मिलेगी जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा।इसके बाद उत्तर कोरिया ने और शक्तिशाली मिसाइलों का परीक्षण किया और अमेरिका को दिखाया कि उनकी ताकत क्या है। नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया को तबाह करने की धमकी देते हुए कहा था कि दक्षिण कोरिया को आग के समुद्र में बदल में देर नहीं लगेगी। इसके बाद से ट्रंप का रुख नरम हुआ और फिर दोनों देशों ने जहरीली बयानबाजी को काबू किया।अब 65 साल पुरानी दुश्मनी जब दोस्ती की ओर कदम बढ़ा चुकी है तो अमेरिका उत्तर कोरिया को यह समझाने में कामयाब हो पाएगा कि वह अपने परमाणु हथियार नष्ट कर दे जो कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता का कारण हैं? विशेषज्ञों की राय देखें तो उत्तर कोरिया शायद ही कभी ऐसा करने के लिए तैयार हो। क्योंकि तानाशाह किम जोंग उन कई बार यह कह चुके हैं कि उन्हें परमाणु शक्ति संपन्न रहने की जरूरत है जिससे कि वह अमेरिका से अपनी रक्षा कर सकें। ऐसा भी माना जा रहा है कि किम जोंग उन अपने देश के लोगों में अपनी धाक जमाने के लिए भी परमाणु शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है। ताकि लोग अपने देश के शक्तिशाली नेता और हथियारों पर गर्व कर सकें और उसका शासन सुचारू रूप से चलता रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here