धरती पर बढ़ा दबाव तो खत्म हो सकते हैं हम

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विशेषज्ञों ने एक गणितीय मॉडल के जरिए बताया है कि धरती पर आबादी का दबाव बढ़ने के क्या परिणाम हो सकते हैं। यह अध्ययन न्यूयॉर्क स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के विशेषज्ञों ने किया है। विशेषज्ञों ने इस मॉडल के जरिए तीन संभावित परिणामों के बारे में बताया है।वैज्ञानिकों ने आबादी का दबाव बढ़ने और जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम होने पर ग्रह के तीन तरह से प्रभावित होने का अनुमान जताया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में ग्रह की आबादी पूरी तरह से नष्ट हो सकती है, धीरे–-धीरे खत्म हो सकती है या परिस्थिति के मुताबिक खुद को ढाल सकती है। प्रमुख शोधकर्ता एडम फ्रैंक ने कहा कि आबादी के पूरी तरह नष्ट होने पर ग्रह पर रहने वाले 10 में से 7 इनसान समेत जीव-जंतु नष्ट हो जाएंगे और इन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा। इसी तरह आबादी के धीरे–-धीरे खत्म होने की स्थिति में कुछ प्रजातियां पूरी तरह से विलुप्त हो सकती हैं। वहीं, परिस्थिति के मुताबिक खुद को ढालने वाली स्थिति सबसे सरल होगी। इस मॉडल के जरिए विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि ब्रह्मांड के किसी अन्य ग्रह पर अगर कभी जीवन रहा होगा, तो वह सभ्यता कैसे और किन परिस्थितियों में नष्ट हुई होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि धरतीवासियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि धरती पर जलवायु परिवर्तन का असर इस हद तक पहुंच सकता है कि इसे वापस कर पाना मुमकिन ही न हो।प्रोफेसर फ्रैंक का कहना है कि ब्रह्मांड के अन्य ग्रहों की सभ्यताओं के नष्ट होने के तरीकों का अध्ययन कर हम उनसे सबक ले सकते हैं। इससे धरती पर मौजूद परिस्थियों से निपटने में मदद मिल सकती है।

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