लक्षण दिखने से पहले ही पकड़ में आ जाएंगे 10 तरह के कैंसर

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वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका ईजाद किया है जिससे लक्षण नजर आने से काफी पहले एक-दो नहीं कम से कम 10 तरह के कैंसर पकड़ में आ सकते हैं। विशेषज्ञ इसे कैंसर रिसर्च का होली ग्रेल करार दे रहे हैं।अमेरिका के ओहायो में क्लीवलैंड क्लीनिक के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि खून की जांच से लक्षण दिखने के काफी पहले कैंसर का पता लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने इस अध्ययन के लिए 1400 लोगों के आंकड़ों का आकलन किया और इसके उन्हें 90 फीसदी सटीक नतीजे मिले। इस अध्ययन के नतीजे शिकागो में होने वाली अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑनकोलॉजी की सालाना कॉन्फ्रेंस में पेश किए जाएंगे। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि स्वस्थ लोगों के लिए यह जांच अगले 5 से 10 साल में उपलब्ध हो जाएगी।इस जांच से ब्रेस्ट, ओवेरियन, बाउल और लंग कैंसर का पता लगाया जा सकेगा। यह कैंसर कोशिकाओं द्वारा खून में जारी होने वाले डीएनए के टुकड़ों की जांच कर कैंसर का पता लगाता है। शोध के दौरान विशेषज्ञों ने चार ऐसे लोगों की खून की जांच की, जिन्हें कैंसर नहीं था। इनमें से दो महिलाओं को कुछ ही महीनों के बाद ओवेरियन और एंडोमेट्रियल कैंसर होने का पता लगा था।प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर एरिक क्लीन ने कहा कि कैंसर का होली ग्रेल करार दिए जा रहे इस टेस्ट से ऐसे कैंसर का भी समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिनका ठीक होना संभव नहीं होता। हमें उम्मीद है कि इससे कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। क्लीन ने कहा कि ज्यादातर कैंसर काफी देर में पकड़ में आते हैं। मगर इस लिक्विट बायोप्सी से किसी व्यक्ति में कैंसर के लक्षण नजर आने महीनों या सालों पहले उसके होने की आशंका का पता लगाया जा सकता है।विशेषज्ञों ने जिन 1400 लोगों के आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन किया है उनमें से 561 लोग कैंसर मुक्त थे और उनकी सभी जाचें सामान्य रही थीं। तकरीबन 845 लोगों को हाल ही में कैंसर की जानकारी हुई थी। खून की इस जांच के नतीजे एक से दो हफ्ते के भीतर आ जाते हैं। इससे 10 तरह के कैंसर की जांच की जा सकती है और इनकी सटीकता 50 फीसदी भी अधिक है। शोध के दौरान ओवेरियन और पैनक्रिएटिक कैंसर की जांच में 90 फीसदी तक की सटीकता पाई गई। पांच में से चार लोगों में लिवर और गॉल ब्लैडर कैंसर का भी सफलतापूर्वक पता लगाया जा सका।

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