फिक्स डिपॉजिट: सुरक्षा, सहूलियत सेविंग का लाभ, यहां जानें फिक्स डिपॉजिट के बारे में

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आर्थिक रफ्तार में सुधार के बीच बढ़ते कर्ज की मांग और म्यूचुअल फंड्स व बॉन्ड यील्ड से मिल रही कड़ी टक्कर के चलते बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अपने फिक्स डिपॉजिट (एफडी) पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। साथ ही उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए बैंकों ने एफडी पर कुछ सहूलियतें देनी भी शुरू की हैं। जैसे एसबीआई ने अपने निवेशकों को बिना एफडी तोड़े पैसे निकालने का विकल्प दिया है। ऐसे में अब एफडी में पैसे लगाना सुरक्षित निवेश के साथ सहूलियत और बेहतर सेविंग के तिहरे लाभ का मौका दिलाता है। पेश है हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट।जीएसटी और नोटबंदी जैसे बड़े आर्थिक सुधारों के बाद पिछले कुछ समय से अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंद पड़ी थी। रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 में बैंकों का कुल जमा केवल 6.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो 1963 के बाद यानी पिछले पचपन सालों में सबसे कम बढ़ोतरी है। जबकि मार्च 2017 के मुकाबले मार्च 2018 में म्यूचुअल फंड्स का एसेट (या एयूएम) 22 प्रतिशत बढ़ा है। साफ है लोगों ने बेहतर रिटर्न की उम्मीद में एफडी का दामन छोड़कर म्यूचुअल फंड का रुख किया। लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ ही बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहे कम ब्याज दरों का दौर भी खत्म हो रहा है। एफडी पर मिल रही मौजूदा ब्याज दरें पिछले दो-तीन सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। .
निवेश पर सुरक्षा की गारंटी.
फिक्स डिपॉजिट में निवेश की गई राशि पर बिना किसी जोखिम के बैंक आपको ब्याज के रूप में एक निश्चित रिटर्न देते हैं। इसके अलावा आपने जितनी अवधि के लिए पैसों का निवेश किया है, उसके बीच बाजार या बैंक की हालात कैसी भी हो आपके ब्याज रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एफडी चाहे सरकारी बैंक में हो या निजी अथवा विदेशी बैंक में, यहां जमा धन पूरी तरह सुरक्षित होता है। अगर बैंक दिवालिया भी हो जाता है तो डिपॉजिट इन्शयोरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन के तहत एक लाख रुपये तक की राशि वापस मिल जाती है।.
एफडी तोड़े बिना पैसे निकाल सकेंगे.
एफडी में पैसे लगाने से कई निवेशक इसलिए कतराते हैं कि इसमें एक बार जमा की गई राशि को तय अवधि से पहले नहीं निकाल सकते और यदि किसी मजबूरी में ऐसा किया तो उन्हें न सिर्फ ब्याज से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि बैंक पेनल्टी पर वसूलते हैं। लेकिन सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपने निवेशकों को बिना एफडी तोड़े पैसे निकालने की सहूलियत देनी शुरू की है। एसबीआई ने मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट (एमओडी) स्कीम की शुरुआत की है, जिसके तहत आप कभी भी जरूरत पड़ने पर अपनी एफडी से रकम की निकासी कर सकते हैं। यह निवेशक के बचत अथवा चालू खाते से लिंक होगा, जिससे आप आसानी से निकासी कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि निकासी के बाद शेष राशि पर पहले से तय दर के अनुसार ब्याज मिलता रहेगा। हालांकि इसमें निवेश के लिए कम से कम 10 हजार रुपये जमा कराना जरूरी होगा।.

यहां पैसे लगाकर बड़ी सेविंग करें.
भरोसेमंद हैं सरकारी बैंक: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस साल दूसरी बार अपने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं। बैंक ने पहले फरवरी महीने में रिटेल टर्म डिपॉजिट (फिक्स्ड डिपॉजिट) के तहत एक करोड़ से कम के जमा पर ब्याज दरों को 0.10 से 0.50 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ाया था। इसके बाद मई में कुछ मेच्योरिटीज पर 5 से 25 बेसिस प्वाइंट्स (बीपीएस) तक की बढ़ोतरी की है। अब एक साल वाली एफडी पर सामान्य जमाकर्ताओं को 6.4 से बढ़कर 6.65 फीसदी, वरिष्ठ नागरिकों को 6.9 फीसदी की जगह 7.15 फीसदी की ब्याज दर से रिटर्न मिलेगा। इसी तरह दो से तीन वर्षों वाली मेच्योरिटी पर पांच बीपीएस की बढ़ोतरी के बाद 6.65 फीसदी ब्याज दर हो गई है। इसी तरह वरिष्ठ नागरिकों को 7.1 फीसदी की जगह 7.15 फीसदी का ब्याज मिलेगा। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक 1 से 10 साल के लिए 6.25-6.75% तो आईडीबीआई बैंक 1 से 5 साल तक 6.50-6.75% का ब्याज देता है।.आकर्षित करते निजी बैंक : निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक ने टर्म डिपॉजिट (मियादी जमा) दरों में अप्रैल माह में 100 बेसिस प्वाइंट (1 फीसदी) का इजाफा कर दिया है। टर्म डिपॉजिट को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) भी कहा जाता है। अब बैंक के ग्राहकों को 1 वर्ष के लिए जमा रकम पर 7 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों को 7.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। जबकि 1 करोड़ रुपये से ऊपर की रकम जमा करने वाले सामान्य ग्राहकों को 7.25 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों को 7.75 फीसदी का ब्याज मिलेगा। इसी तरह एक्सिस का 1 से 10 साल के लिए 6.25 से 6.85% इसी अवधि में आईसीआईसीआई का 6.50 से 6.75% ब्याज दर है।.लोकप्रिय हो रहे कॉरपोरेट डिपॉजिट्स: नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) को फंड के लिए बैंकों से मुकाबला करना होता है। ये कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए निवेशकों से पैसे लेती हैं जिसे कॉरपोरेट एफडी कहते हैं। लिहाजा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से ज्यादा ब्याज देती हैं। कई एनबीएफसी ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत से ही अपने डिपॉजिट रेट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसमें श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस, दीवान हाउसिंग फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज ने पिछले दिनों ब्याज दरें 0.05-0.50 फीसदी तक बढ़ाई हैं। श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस पांच साल की मेच्योरिटी वाले डिपॉजिट पर 8.25 फीसदी का रिटर्न ऑफर कर रही है, जोएसबीआई के इसी मेच्योरिटी के डिपॉजिट पर दिए जा रहे ब्याज से 1.5 फीसदी ज्यादा है।
ये जानकारियां जरूरी
फीसदी तक इजाफा किया है बैंकों ने अपनी एफडी पर ब्याज दरों में.
फीसदी तक हिस्सा एफडी की रकम का लोन में लिया जा सकता है.
एफडी में अगर एक लाख रुपये से ज्यादा राशि जमा है तो यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। क्योंकि डीआईसीजीसी एक उपभोक्ता को अधिकतम 1 लाख रुपये की ही गारंटी देता है।.
लिहाजा आपको 3 से 4 लाख रुपये निवेश करने हैं तो अलग-अलग बैंकों में डालना बेहतर होता है। .
इससे आपकी पूरी रकम सुरक्षित रहेगी और दूसरे आपात स्थिति में एफडी तोड़ने के लिए सिर्फ एक ही कम रकम वाली एफडी का नुकसान होगा।.
कॉरपोरेट एफडी में पैसे लगाने से पहले रेटिंग ऐजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग को जरूर देखें। .
इसमें एएए या एए रेटिंग वाली कंपनियों में ही निवेश करें और इसका 10-20 साल का रिकॉर्ड भी देखें।.
एफडी पर मिलने वाला ब्याज कर के दायरे में आता है, लिहाजा 10 हजार रुपये सालाना से अधिक की ब्याज रकम पर बैंक आपके आयकर स्लैब के हिसाब से कटौती कर सकते हैं।

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