कानून में संशोधन! अब कोई चैटिंग में भी नहीं भेज पाएगा अश्लील तस्वीरें

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सरकार ने परंपरागत और आधुनिक सोशल मीडिया में महिलाओं को अभद्र और अशिष्ट रूप में प्रस्तुत करने से रोकने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग के अंतर्गत एक केंद्रीय एजेंसी बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि यह प्रावधान करने के लिए ‘स्त्री अशिष्ट रुपण प्रतिषेध अधिनियम 1986’ में संशोधन करने की संसदीय समिति की सिफारिश मंत्रालय ने स्वीकार कर ली है।मंत्रालय ने कहा है कि इस अधिनियम में बदलाव की जरूरत लंबे समय से की जा रही थी और इसे लेकर वर्ष 2012 में राज्यसभा में एक संशोधित विधेयक पेश किया गया था जिसे बाद में संसदीय स्थायी समिति में भेज दिया गया था। समिति ने सिफारिश में कहा कि इसमें भारतीय विज्ञापन मानक परिषद, भारतीय प्रेस परिषद, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधि होने चाहिए। इसके अलावा महिलाओं के मुद्दों पर कार्यरत किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को भी इसका सदस्य बनाना चाहिए। यह केंद्रीय एजेंसी किसी कार्यक्रम, विज्ञापन और प्रकाशन किसी भी महिला की अभद्र प्रस्तुति से संबंधित शिकायतों को सुन सकेगी और जांच कर सकेगी।सरकार का कहना है कि स्त्री अशिष्ट रुपण प्रतिषेध अधिनियम 1986 में किसी विज्ञापन, प्रकाशन, लेखन, चित्रकारी, रेखांकन या अन्य किसी भी माध्यम से महिलाओं को अशिष्ट रुप में प्रस्तुत करने से रोका गया है लेकिन इस अधिनियम के लागू होने के बाद से प्रौद्योगिकी के परिणाम स्वरुप मीडिया के कई रूप इंटरनेट, मल्टी मीडिया मैसेजिंग सिस्टम, केबल टेलीविजन, स्काइप, वीबर, व्हाट्सएप, चैटऑन, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम आदि सामने आ गए हैं। इसलिए अधिनयम के दायरे को व्यापक बनाने की जरुरत महसूस की जा रही है।मंत्रालय ने कहा है कि अधिनियम में संशोधन करने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों के साथ विचार-विमर्श किया गया है। प्रस्तावों के अनुसार विज्ञापन की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा और इसमें डिजिटल तथा एसएमएस-एमएमएस को भी शामिल किया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रोनिक होर्डिंग भी शामिल होंगे। वितरण, प्रकाशन की परिभाषा में परिवर्तन होगा और अपलोडिंग को भी शामिल किया जाएगा।

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