मुखर्जी के भाषण ने भारत के गौरवशाली अतीत की याद दिलाई : संघ

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि गुरुवार को संगठन के मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में देश के गौरवशाली अतीत की याद दिलाई। साथ ही उन्होंने समावेशी, बहुलतावाद एवं विविधता में एकता को भारत की बुनियाद बताया।संघ के प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि मुखर्जी के भाषण ने देश की 5,000 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाई। हमारी व्यवस्था भले ही बदल सकती है लेकिन हमारे मूल्य वही रहेंगे। उन्होंने समावेशी, बहुलवाद और विविधता में एकता को भारत की नींव बताया। कुमार ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने और राष्ट्र, राष्ट्रवाद तथा देशभक्ति की विचारधारा पर अपने विचार रखने के लिए हम लोग उनका धन्यवाद करते हैं। गौरतलब है कि मुखर्जी ने अपने भाषण में धर्म, घृणा, हठधर्मिता और असहिष्णुता के जरिए भारत को परिभाषित करने के किसी भी प्रयास के प्रति चेताते हुए कहा कि इससे केवल हमारा अस्तित्व ही कमजोर होगा। कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा है कि नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में संबोधन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कद और ऊंचा हो गया है। एक दिन पहले कार्यक्रम में जाने को लेकर सवाल खड़ा वाले कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि मुखर्जी के नैतिक बल पर कभी संदेह नहीं रहा है।शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि प्रणाम प्रणब दा। नागपुर से आप पहले से भी अधिक कद्दावर बनकर निकले हैं। आपके किरदार, नैतिक बल, विवेक और धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक लोकतंत्र को बुलंद रखने के प्रति आपकी प्रतिबद्धता पर कभी संदेह नहीं था। उन्होंने कहा कि आपने आरएसएस को भारत के बहुलवाद की समृद्धि और विविधता के बारे में बताया। आशा करता हूं कि वे आपके संदेश को आत्मसात करेंगे। मुखर्जी के गुरुवार को संघ के कार्यक्रम में पहुंचने के बाद शर्मा ने कहा था कि संघ मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीरें देखकर पार्टी के लाखों कायकर्ताओं और बहुलवाद, विविधता एवं बुनियादी मूल्यों में विश्वास करने वालों को दुख हुआ है।पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के मुख्यालय में जाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने प्रणब मुखर्जी के नागपुर जाने पर ही सवाल खड़े किए हैं। तिवारी का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति ने संघ मुख्यालय जाकर राष्ट्रवाद पर संबोधन क्यों दिया। जबकि प्रणब हमेशा संघ के इरादों को लेकर आगह करते रहे हैं। वहीं मनीष तिवारी के इन सवालों पर कांग्रेस ने किनारा कर लिया। पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के जाने पर पार्टी अधिकारिक तौर पर अपना मत स्पष्ट कर चुकी है। इससे आगे पार्टी को इस मामले में कुछ नहीं कहना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्वीट किया कि 1980 और 1990 के दशक में संघ के इरादे और योजना को लेकर हमे आगह किया गया। प्रणब मुखर्जी उस सरकार का हिस्सा थे, जिसनें 1975 और 1992 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति को यह बताना चाहिए कि उस वक्त का संघ और आज की आरएसएस बदल गई है।भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने और राष्ट्रवाद पर विचार रखने को ऐतिहासिक घटना बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खुलेपन की भावना और विचारों के आदान प्रदान से सहिष्णुता और सौहार्द की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी।आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निमंत्रण स्वीकार करने के लिए प्रणब मुखर्जी और उन्हें आमंत्रित करने के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत की सराहना की। प्रणब मुखर्जी कई दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि दोनों के विचार अपने आप में महत्वपूर्ण विषय को परिलक्षित करते हैं। संघ के आजीवन स्वयंसेवक आडवाणी ने कहा कि उनका मानना है कि प्रणब मुखर्जी और भागवत ने विचारधाराओं एवं मतभेदों से परे संवाद का सही अर्थों में सराहनीय उदाहरण पेश किया है।

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