68 साल बाद US-उत्तर कोरिया में ऐतिहासिक वार्ता, आज मिलेंगे ट्रंप और किम

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप में ऐतिहासिक वार्ता होगी। 1950-53 में हुए कोरियाई युद्ध के बाद से अब तक अमेरिका और उत्तर कोरिया के नेता कभी नहीं मिले और न ही फोन पर बात की है। ट्रंप और किम सेंटोसा द्वीप के कैमेला होटल में वार्ता के लिए रविवार को ही सिंगापुर पहुंच गए। इस बैठक के सिंगापुर की सरकार ने भारी सुरक्षा के इंतजाम कर रखे हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि किम ने ट्रंप को जुलाई में दूसरी मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया आने का न्योता दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दोनों नेताओं की दूसरी वार्ता भी हो जाती है तो तीसरी मुलाकात वाशिंगटन में होगी।अमेरिका ने वार्ता से पहले उत्तर कोरिया को बड़ी पेशकश की है। अमेरिका ने कहा कि यदि उत्तर परमाणु हथियारों को खत्म करता है तो हम उसे विशिष्ट सुरक्षा गारंटी देंगे। वार्ता की पूर्व संध्या पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई कि किम के साथ होने वाली वार्ता से अच्छे नतीजों पर पहुंचा जा सकता है। वहीं विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि उन्हें अमेरिका के अनुमान से भी अधिक तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद है। पोम्पियो ने कहा कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार को त्यागने पर हम विशिष्ट सुरक्षा गारंटियों की पेशकश करने के लिए तैयार है जो मौलिक तौर पर पहले से भिन्न होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि परमाणु निशस्त्रीकरण का लक्ष्य हासिल होने तक उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगे रहेंगे। पोम्पियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप किम से मुलाकात के लिए पूरी तरह तैयार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडीनो ने कहा कि दोनों पक्षों के राजनयिक अपने मतभेदों को कम करने के लिए बंद कमरों में बातचीत कर रहे हैं।ट्रंप ने सिंगापुर के राष्ट्रपति भवन इस्ताना में सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियन लूंग के साथ लंच के बाद यह बयान दिया। ट्रंप ने मेजबानी के लिए ली का शुक्रिया अदा किया। साथ ही ट्रंप ने इस वर्ष सिंगापुर की यात्रा पर आने के राष्ट्रपति हलीमा याकूब के न्योते को स्वीकार कर लिया है। बैठक के दौरान अधिकारियों ने ट्रंप का जन्मदिन भी मनाया। 14 जून को ट्रंप 72 साल के हो जाएंगे।अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ यहां रक्षा मंत्री माइक पोम्पिओ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन, व्हाइट हाउस प्रेस सचिव सारा सैंडर्स और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ जॉन केली भी पहुंचे।ऐसा कहा जा रहा है कि किम अपने साथ टॉयलेट भी लेकर आए हैं। किम जोंग सुरक्षा कारणों की वजह से अपना टॉयलेट साथ रखते हैं। किम को इस बात की चिंता लगी रहती है कि दूसरे देश की एजेंसियां उनके मल का नमूना चुरा सकती हैं। उसे डर रहता है कि मल की जांच से उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का पता चल सकता है। बता दें कि वह जब दक्षिण कोरिया गए थे, तब भी वह अपने साथ टॉयलेट लेकर गए थे।
उत्तर कोरिया
– किम ट्रंप के साथ पूर्णतः शांति स्थापित करने वाले तरीके पर बात करेंगे
– प्योंगयांग अमेरिका के साथ अपने रिश्ते सुधारने की दिशा में काम करेगा
– कोरियाई प्रायद्वीप में निश्चित और लंबे वक्त की शांति प्रक्रिया पर बात होगी
– इसके साथ ही परमाणु निरस्त्रीकरण और अन्य साझा मुद्दों पर भी बात होगी
किम से मुलाकात से पहले सिंगापुर के प्रधानमंत्री से मिले डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका
– ट्रंप को इस मुलाकात के सकारात्मक रहने का एहसास है
– ट्रंप ने इस मुलाकात के लिए कोई तैयारी नहीं की है
– परमाणु निशस्त्रीकरण कैस होगा, यह अभी तक तय नहीं है
– उत्तर कोरिया से कितने आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे इसका भी पता नहीं
सुरक्षा के लिए गोरखा जवान तैनात
ट्रंप और किम जोंग के बीच होने वाली शिखर वार्ता की सुरक्षा की जिम्मेदारी नेपाल के गोरखा जवानों के पास है। गोरखा को दुनिया के सबसे खतरनाक योद्धा माना जाता है। हालांकि दोनों नेताओं के साथ उनकी अपनी सुरक्षा टीम होगी लेकिन इसके बावजूद सिंगापुर पुलिस और गोरखा जवानों पर भी इस सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा होगा।
चीन को किम के दूर जाने का डर
किम और ट्रंप के बीच बातचीत को लेकर चीन डरा हुआ है। चीन को लग रहा है शीत युद्ध के दौर से उसका साथी उत्तर कोरिया उससे दूर हो सकता है। क्योंकि अभी तक उत्तर कोरिया चीन के सबसे करीब रहा है। ट्रंप से वार्ता से पहले किम दो बार चीन जा चुके हैं। चीन को डर है कि वार्ता के बाद किम जोंग-उन पाला बदलकर चीन को किनारे न कर दे। विशेषज्ञों को कहना है कि चीन के नेताओं को यह चिंता सता रही है कि किम जोंग चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए अपने लंबे समय से दुश्मन रहे अमेरिका को गले लगा सकते हैं। चीन को यह भी चिंता है कि बैठक में संयुक्त कोरियाई प्रायद्वीप की भी बात हो सकती है जो उत्तर को दक्षिण कोरिया से जोड़ेगा। चीन के लिए यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति होगी जब अमेरिकी सैनिक उसके दरवाजे पर होंगे और अब तक ऐसा होने से रोकने वाले उत्तर कोरिया की भूमिका भी खत्म हो जाएगी।

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