शुजात बुखारी की हत्या: आतंकवादियों के हाथों मारे गए चौथे पत्रकार

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आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में वरिष्ठ पत्रकार और राज्य के चर्चित अखबार ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक सुजात बुखारी की गुरुवार को गोली मार हत्या कर दी। हमले में बुखारी के दोनों पीएसओ की भी मौत हो गई है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया समेत तमाम हस्तियों ने उनकी हत्या की निंदा की है।
आतंकवादियों के हाथों मारे गए चौथे पत्रकार
– 1991 में अलसफा के संपादक मोहम्मद शबान वकील की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।
– 1995 में बम धमाके में पूर्व बीबीसी संवाददाता यूसुफ जमील बाल-बाल बच गये लेकिन एएनआई के कैमरामैन की जान चली गई थी।
– 31 जनवरी, 2003 को नाफा के संपादक परवेज मोहम्मद सुल्तान की आतंकवादियों ने हत्या कर दी।
आतंकियों के हमले में मारे जाने से महज कुछ घंटे पहले शुजात बुखारी ने ट्विटर पर तब अपने काम का जबर्दस्त बचाव किया जब दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने उन पर कश्मीर को लेकर ‘पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग’ का आरोप लगाया। उन्होंने घाटी में कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी पोस्ट की थी। अपने आखिर ट्वीटों में से एक में उन्होंने लिखा था, ‘कश्मीर पर पहली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार रिपोर्ट मानवाधिकार उल्लंघन की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करती है।’ विशिष्ट पहचान एवं मुखर बुखारी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा था, ‘कश्मीर में हमने पत्रकारिता गर्व के साथ की है और जमीन पर जो कुछ होगा, हम उसे प्रमुखता से उठाते रहेंगे।’शुजात बुखारी पर सन 2000 में भी आतंकियों ने हमला किया था। हालांकि उस समय वे बाल-बाल बच गए थे। इस हमले के बाद से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करा रखी थी।शुजात बुखारी से आतंकी इसलिए काफी नाराज थे कि वह घाटी में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जोर-शोर से लगे थे। वह इस संबंध में कई सम्मेलनों का आयोजन करा चुके थे। वह पाकिस्तान के साथ परदे के पीछे (ट्रैक-2) प्रक्रिया के भी हिस्सा थे।बुखारी की हत्या की निंदा करते हुए जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती गुरुवार को रो पड़ीं। टीवी चैनलों पर प्रसारित फुटेज में महबूबा वरिष्ठ पत्रकार के साथ कुछ दिन पहले हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए रो पड़ीं। अपने आंसुओं को थामने की कोशिश करतीं भावुक महबूबा ने कहा, ‘मैं क्या कह सकती हूं। कुछ दिन पहले ही वह मुझसे मिलने आए थे।’उन्होंने कहा, ‘मैं बर्बर हिंसा के कृत्य की कड़ी निन्दा करती हूं और प्रार्थना करती हूं कि ईश्वर उनकी (बुखारी) आत्मा को शांति प्रदान करें। उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। शुजात की हत्या से आतंकवाद का घिनौना चेहरा दिखा है। वह भी ईद की पूर्व संध्या पर। शांति बहाल करने के हमारे प्रयासों को कमतर करने के प्रयास करने वाली शक्तियों के खिलाफ हमें एकजुट होना चाहिए। न्याय होगा।’

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