कोलकाता में आयोजित होगा भारत का पहला ट्रांसजेंडर साहित्य सम्मेलन

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को भारत के पहले ट्रांसजेंडर साहित्य सम्मेलन की मेजबानी का मौका मिला है। जुलाई के दूसरे हफ्ते में साहित्य अकैडमी की तरफ से यह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

साहित्य अकैडमी के सेक्रटरी केएस राव ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘ट्रांसजेंडर लेखकों के लिए पहली बार इस तरह का साहित्यिक सम्मेलन आयोजित हो रहा है और कोलकाता ऐसा करने वाला पहला शहर होगा।’

अकैडमी के पूर्वी क्षेत्र के प्रभारी मिहिर साहू ने जुलाई में सम्मेलन होने की पुष्टि करते हुए कहा, ‘पिछले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हमने नारी चेतना के नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें ट्रांसजेंडर लेखकों ने भी हिस्सा लिया था। जुलाई में आयोजित होने वाला सम्मेलन केवल ट्रांसजेंडर साहित्यकारों के लिए होगा।’

साहित्य अकैडमी के बंगाली सलाहकार बोर्ड के संयोजक सुबोध सरकार ने बताया कि इससे समुदाय का सशक्तीकरण होगा। उन्होंने बताया, ‘मैं नियमित रूप से अबामानब नाम की लघु पत्रिका को पढ़ता हूं। मानबी बंदोपाध्याय द्वारा संपादित इस पत्रिका में एलजीबीटी (लेजबियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर) लेखकों का साहित्य है। यह उन आवाजों को एक प्लैटफॉर्म मुहैया करा रहा है, जिन्हें लंबे अरसे तक दबाया गया।

देश की पहली ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मानबी बंदोपाध्याय ने साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले ट्रांसजेंडर लेखकों का नाम सुझाने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है, ‘मैंने रानी मजूमदार, अरुणा नाथ, देबोज्योति भट्टाचार्च, अंजलि मंडल और देबदत्त बिस्वास जैसे लेखकों का नाम लिस्ट में शामिल किया है। अंजलि पेशे से हिजड़ा हैं और बच्चों के पैदा होने पर जो गाने गाए जाते हैं, उन्हें अंजलि ने लिखा है। मैंने उनके गानों को अपनी लघु पत्रिका में प्रकाशित किया है और मुझे लगता है कि उन्हें एक कवयित्री के रूप में प्लैटफॉर्म मिलने का हक है।’

देबदत्त बिस्वास (24 वर्ष) ने रबींद्र भारती यूनिवर्सिटी से बंगाली में मास्टर्स किया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है कि मेरे समुदाय के सदस्यों के साहित्य को तवज्जो मिल रही है। मेरे पैरंट्स भी मुझे अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिए जाने से काफी खुश हैं।’

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