कश्मीरः आतंकियों के खिलाफ तैयार मास्टरप्लान को भारत सरकार की हरी झंडी

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आतंकवाद विरोधी बल एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को जम्मू कश्मीर में तैनात किया गया है। जहां वे मुठभेड़ और लोगों को बंधक बनाने जैसी स्थितियों से निपटने में सुरक्षाबलों की मदद करेंगे। यहां तैनाती के बाद एनएसजी को भी लाइव मुठभेड़ों से निपटने का अनुभव होगा।जम्मू-कश्मीर में पहले से ही तैनात सुरक्षा एजेंसियों को लेकर सेना नहीं चाहती थी कि एनएसजी भी यहां आए। लंबे विचार विमर्श के बाद बीते महीने गृह मंत्रालय ने एनएसजी की तैनाती पर मुहर लगाया था। एनएसजी बीएसएफ के साथ मिलकर हुमहमा कैंप पर ट्रेनिंग कर रही है।गृह मंत्रालय कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय सुरक्षा बल (एनएसजी) को इसलिए तैनात किया है ताकि उच्च जोखिम वाली, आतंकवाद से संबंधित घटना होने पर वे भारतीय सेना, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के साथ मिल कर काम कर सकें।यह पहली बार नहीं है जब ब्लैक कैट के नाम से पहचाने जाने वाले एनएसजी कमांडो जम्मू कश्मीर में तैनात किये जाएंगे। इस बल के कमांडो पूर्व में भी घाटी में तैनात हो चुके हैं।अधिकारी ने बताया कि आतंकियों को पकड़ने के लिए की जाने वाली घेराबंदी के दौरान बंधकों को रिहा करने का उनका विशेष कौशल ऐसे हालात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2017 सुरक्षाबल के 82 लोग मारे गए थे और इस साल अब तक करीब 34 लोग मारे गए हैं। वहीं, आम लोगों की बात करें तो 2017 में 68 लोग मारे गए थे और इस साल अभी तक 38 लोग मारे गए हैं।हाल ही में तेलंगाना में एनएसजी के एक समारोह के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि देश के समक्ष नयी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुये सरकार विचार कर रही है कि बल की भूमिका को कैसे बढ़ाया जा सकता है क्योंकि आतंकियों द्वारा लोगों को मानव ढाल बनाने और नागरिक परिसर में घुस आने वाली जैसी स्थिति में अभियानों के दौरान ये कमांडो एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वर्ष 1984 में एनएसजी का गठन किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पंजाब के अमृतसर शहर में स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों का सफाया किया गया था।ब्लैक कैट कमांडो को मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमलों से जनवरी 2016 में पठानकोट वायु सेना शिविर पर हुए आतंकी हमले से और गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले से निपटने के लिए तैनात किया गया था।संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार जम्मू कश्मीर में इस साल जनवरी से मार्च के मध्य तक आतंकी हिंसा की करीब 60 घटनाएं हुईं जिनमें 15 सुरक्षा कर्मी और 17 आतंकी मारे गए।

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