दुनिया भर में निंदा के बाद ट्रंप ने बदली प्रवासी नीति, मां-बाप से अलग नहीं होंगे बच्चे

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विवादित प्रवासी नीति में बदलाव किया है। बदलाव के चलते अब बच्चे प्रवासी मां-बाप से अलग नहीं होंगे। इस आदेश में कहा गया है कि अब अवैध प्रवासी परिवारों को एकसाथ हिरासत में लिया जाएगा।अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को उनके बच्चों से अलग कर दिया जा रहा था। पिछले कुछ हफ्तों में ऐसे 2,300 बच्चों को उनके मां-बाप से जुदा किया गया। इस नीति की अमेरिका और दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई। नए आदेश में कहा गया है कि अगर माता-पिता के हिरासत में लिए जाने से बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ने की आशंका हो तो उन्हें अलग ही रखा जाएगा।आदेश में यह नहीं बताया गया है कि बच्चों को उनके माता-पिता से कितने समय के लिए अलग रखा जाएगा। साथ ही ट्रंप का यह आदेश कब से लागू होगा यह अभी साफ नहीं है। आदेश में आप्रवासन के उन मामलों को प्राथमिकता से निबटाने को कहा गया जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया हो। आदेश के मुताबिक, ये परिवार तब तक साथ रहेंगे जब तक कि उन पर अवैध रूप से सीमा पार करने के मामले में मुकदमा पूरा न हो जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी व प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप गुरुवार को भारी बारिश के बीच अचानक टेक्सास पहुंची। मेलानिया यहां गिरफ्तार किए गए प्रवासियों के बच्चों से मिलने दो केंद्रों पर पहुंची। इस दौरान वह 60 बच्चों से मिलीं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रवासी नीति में बदलाव का भी स्वागत किया। ये बच्चे कई हफ्तों से अपने मां-बाप से अलग रखे गए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह अपने मां-बाप से अलग हुए बच्चों की तस्वीरें देखकर पिघल गए और इसीलिए उन्होंने ये आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद परिवारों को अलग होते देखना पसंद नहीं है। अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और बेटी इवांका ट्रंप भी परिवारों को साथ रखे जाने का समर्थन करती हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि उनका प्रशासन सीमा पर सख्ती बनाए रखेगा और इस संबंध में कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति बरकरार रहेगी। इसके साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।ट्रंप प्रशासन के प्रवासी कानून पर विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब जंजीर लगे दरवाजों के पीछे प्रवासियों के बच्चों की कुछ तस्वीरें मीडिया में आईं। इन तस्वीरों को देखकर बच्चों के लिए बने इन केंद्रों की तुलना नाजी यातना शिविरों से की जाने लगी। मैक्सिको के विदेश मंत्री लुइस विदेगारा कासो ने बच्चों को उनके परिवार से अलग किया जाना क्रूर और अमानवीय बताया था।
हालांकि ट्रंप के आदेश से विपक्षी डेमोक्रेट संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इसे अपर्याप्त बताया है। डेमोक्रेटिक नेता नेन्सी पेलोसी ने कहा कि राष्ट्रपति का शासकीय आदेश बाल उत्पीड़न के एक रूप को दूसरे से बदलने का काम करेगा। भयभीत बच्चों को संरक्षण देने के बजाए राष्ट्रपति ने अपने अटॉर्नी जनरल को निर्देश दिए कि वह परिवारों को जेल जैसी स्थितियों में लंबे समय तक कैद रखने के लिए रास्ता तलाशे।भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि ट्रंप का नया शासकीय आदेश पूरी तरह से अस्वीकार्य है जो कि परिवारों को अनिश्चित समय के लिए हिरासत में रखने की इजाजत देता है। उन्होंने कहा कि प्रवासियों के नजरबंदी शिविर अमानवीय हैं।विवादित प्रवासी कानून के मुताबिक अमेरिका की सीमा में अवैध तरीके से घुसने वालों पर आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। ऐसे प्रवासियों को उनके बच्चों से भी मिलने नहीं दिया जाता और उन्हें अलग रखा जाता है। इन बच्चों की देखभाल अमरीका का’डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज करता है। इससे पहले बिना जरूरी कागजात के पहली बार सीमा पार आने वाले प्रवासियों को अदालत में बुलाया जाता था।अमेरिका की अवैध तरीके से प्रवेश करने वालों लोगों में 52 भारतीय भी हैं। इन्हें अमेरिका की आरेगन जेल में रखा गया है। ये प्रवासी अमेरिका में आश्रय की मांग कर रहे हैं। महिला सांसद सुजैम बोनामीकी ने अपने ब्लॉग पर लिखा, शेरिडन में हिरासत में रखे गए लोगों में सबसे बड़ा समूह भारतीय प्रवासियों का है। इन भारतीय नागरिकों में हिंदी और पंजाबी बोलने वाले सबसे अधिक हैं।

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