रेड वारः भारत ने US को दिया जवाब, 29 उत्पादों पर बढ़ाया आयात शुल्क

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार युद्ध का जवाब देते हुए भारत ने गुरुवार को अमेरिका के 29 उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि ये बढ़ा शुल्क चार अगस्त से प्रभावी होगा।जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिका से मंगाई जाने वाले दाल-दलहन, लौह एवं इस्पात उत्पादों समेत 29 उत्पादों पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है। इसमें मटर, बंगाल चना और मसूर दाल, बादाम, अखरोट, सेब, लोहा और इस्पात शामिल हैं। इन उत्पादों पर आयात शुल्क में 25 से 90 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है।इंडियन काउंसिल फॉर फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉ. एम जे खान के मुताबिक अमेरिकी उत्पादों के भारतीय बाजार में बड़ी तादाद में आने से यहां के छोटे किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल पाते थे। सरकार के इस कदम से दालें पैदा करने वाले किसानों और सेब के उत्पादकों को राहत मिलेगी।भारत ने स्टील और एल्युमिनियम में उत्पाद शुल्क को लेकर अमेरिका को डब्ल्यूटीओ में भी घसीटा है। भारत हर साल 1.5 अरब डॉलर मूल्य का स्टील और एल्युमिनियम हर साल अमेरिका को निर्यात करता है। भारत का 2016-17 में अमेरिका को निर्यात 42.21 अरब डॉलर और आयात 22.3 अरब डॉलर रहा।पहले खबर थी कि भारत 800 सीसी से अधिक क्षमता वाले मोटरसाइकिलों पर भी आयात शुल्क बढ़ा सकता है। ट्रंप की नाराजगी के बाद भारत ने हार्ले डेविडसन जैसी बाइकों पर सीमा शुल्क 100 से 50 फीसदी कर दिया था।व्यापारिक गतिरोध के बीच भारत और अमेरिका 26-27 जून को व्यापारिक वार्ता करेंगे। इसमें स्टील-एल्युमिनियम पर शुल्क, अमेरिकी वीजा पर कड़े नियम जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।अमेरिका ने 9 मार्च को स्टील पर 25 फीसदी और एल्युमिनियम पर 15 फीसदी आयात शुल्क की घोषणा की थी। इसका चीन और यूरोपीय संघ ने जवाब दिया। भारत पर भी इसका असर पड़ा है। कनाडा, तुर्की और कई अन्य देश भी इस कारोबारी जंग में कूद पड़े हैं।चीन ने 200 अरब डॉलर के आयात पर शुल्क लगाने की धमकी को लेकर अमेरिका पर दबाव तथा ब्लैकमेल करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है। वहीं अमेरिकी रिजर्व बैंक के अध्यक्ष जेरोमी पावेल ने तक कह दिया है कि संरक्षणवाद की नीति से नया वैश्विक आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
भारत ने स्टील-एल्युमिनियम पर शुल्क से राहत की मांग की थी, अमेरिका नहीं माना
भारत ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट की मांग की थी, अमेरिका ने खारिज की
सुरेश प्रभु व्यापार वार्ता को जून में अमेरिका गए थे, लेकिन गतिरोध नहीं टूटा

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