सात वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट में रहने के बाद आज रिटायर हो जाएंगे जस्टिस जे. चेलमेश्वर

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करनेवाले सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्वर आज अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। सात वर्षों तक शीर्ष अदालत में रहने के बाद वे शुक्रवार को विदा हो रहे हैं।एम.बी. लोकुर और कुरियन जोसफ के साथ उन्होंने अदालत में केसों की चयन प्रक्रिया और 1 दिसंबर 2014 को सीबीआई के विशेष जज बी.एच. लोया की मौत के संवेदनशील मामलों को उठाया था। जस्टिस रंजन गोगोई,12 जनवरी किए हुई यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसी पहली घटना थी जिसके कोर्ट के गलियारे से लेकर पूरा देश हैरान था।जस्टिस चेलमेश्वर ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर और जेएस खेहर के कार्यकाल के दौरान कोलेजियम की बैठकों का बहिष्कार कर दिया था। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि जब तक कोलेजियम (सीजेआई समेत पांच वरिष्ठतम जजों का चयन मंडल) की बैठकों का एजेंडा सदस्य जजों को नहीं बताया जाएगा वह कोलेजियम में नहीं आएंगे।उनके विरोध को देखते हुए मौजूदा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कोलेजियम के फैसलों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया। यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक बड़ी घटना थी, क्योंकि 1993 में कोलेजियम व्यवस्था के अस्तित्व में आने के बाद यह पहला बार था जब उसके फैसले सार्वजनिक किए गए।वह नौ न्यायाधीशों की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था। वह न्यायमूर्ति जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने उच्चतर न्यायपालिका में नियुक्ति से संबंधित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को निरस्त किया था।वह तीन मई 2007 को गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने थे और बाद में केरल उच्च न्यायालय में स्थानान्तरित हुये। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर 10 अक्तूबर 2011 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने थे।

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