J&K: BJP अध्यक्ष को आतंकियों ने दी जान से मारने की धमकी, पाकिस्तान से आई कॉल

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जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक उथलपुथल के बीच राज्य के भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना को आतंकवादी संगठनों की ओर से जान से मारने की धमकी मिलने से माहौल और गरमा गया है।रैना ने मीडिया से बातचीत करते हुए गुरुवार को बताया कि उन्हें आतंकवादी संगठनों की तरफ से जान से मारने की धमकी मिली है। उन्होंने कहा, जान से मारने की धमकी के संबंध में मैंने संबंधित अधिकारियों और राज्यपाल को सूचना दे दी है। मुझे पिछले कुछ समय से ही ऐसी धमकियां मिल रही हैं।भाजपा अध्यक्ष ने कहा, मुझे गुरुवार को ही जान से मारने की धमकी देने की एक कॉल कराची से भी आई है। रैना उग्र छवि के नेता हैं और पाकिस्तान के खिलाफ मुखर बयान देने से घबराते नहीं हैं। उन्हें इसी वर्ष 13 मई को राज्य के भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा तुरंत भंग कर राज्य में चुनाव कराए जाने चाहिए। पीडीपी और भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि दोनों ने सोची-समझी रणनीति के तहत गठबंधन तोड़ने की पटकथा लिखी।नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष अबदुल्ला ने कहा, पीडीपी और भाजपा ने अपनी राजनीतिक रणनीति को बनाने के लिए एक शानदार फिक्स स्क्रिप्ट तैयार की, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि जनता और हम लोग बेवकूफ नहीं हैं जो उनके नाटक को समझ न पाएं। अब्दुल्ला ने पीडीपी-बीजेपी के गठबंधन पर तंज सकते हुए एक वीडियो भी शेयर किया। इस वीडियो में फिल्म के सीन का कुछ हिस्सा है, जिसमें एक राजा दूसरे किरदार से आपस में नकली लड़ाई करने की बात करते हैं ताकि तानाशाही बरकरार रखी जा सके और सत्ता में बने रहने के लिए लोगों को मूर्ख बनाया जा सके।भाजपा पर तेज हमला करते हुए शिवसेना ने गुरुवार को आरोप लगाया कि अराजकता फैलाने के बाद भगवा दल जम्मू-कश्मीर में सत्ता से बाहर हो गया और उसने जो लालच दिखाया है उसके लिए इतिहास उसे कभी माफ नहीं करेगा। शिवसेना ने भाजपा के कदम की तुलना अंग्रेजों के भारत छोड़कर जाने से करते हुए कहा कि जब भाजपा इस राज्य में आतंक और हिंसा पर लगाम नहीं लगा पाई तो उसने ठीकरा पीडीपी पर फोड़ दिया।अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा, घाटी में अराजकता फैलाने के बाद भाजपा कश्मीर में सत्ता से बाहर चली गई। वहां हालात कभी भी इस हद तक नहीं बिगड़े थे। इतने बड़े स्तर पर खून की नदियां कभी नहीं बहीं थी और पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में जवान शहीद नहीं हुए थे।

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