उपेंद्र कुशवाहा के योग ने ठंडा किया राजद का जोश, असमंजस में कांग्रेस

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रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के मुद्दे पर राजद वेट एंड वॉच के मोड में आ गया है। वहीं, कांग्रेस असमंजस की स्थिति में है।
पटना । केंद्रीय मंत्री एवं रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को लेकर पिछले कई हफ्तों से बिहार की राजनीति में कयासों का दौर जारी था। भाजपा के भाईचारा भोज और राजग के घटक दलों की इफ्तार पार्टियों में नहीं शामिल होकर खुद कुशवाहा ने कई तरह की चर्चाओं को हवा दी थी।इन्हीं परिस्थितियों में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का खुला ऑफर भी दिया था। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह तो कुशवाहा की पार्टी रालोसपा के गठबंधन के अंग बनने के दिन-तिथि और मुहूर्त भी बताने लगे थे, किंतु हाजीपुर में राजग के घटक लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के साथ योग कार्यक्रम में शिरकत करके कुशवाहा ने अपने बारे में लगाए जा रहे कयासों को फिलहाल झुठला दिया है। वहीं, कांग्रेस में इस मुद्दे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।कुशवाहा के ताजा स्टैंड से राजद के इंतजार को धक्का लगा है, क्योंकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गठबंधन की सारी गतिविधियों को वेट एंड वॉच के मोड में डाल रखा है। उन्हें लगता है कि चुनाव के दिन नजदीक आते ही राजग के प्रति कुशवाहा का आकर्षण धीरे-धीरे घटता जाएगा। राजद के प्रदेश प्रधान महासचिव आलोक कुमार मेहता के मुताबिक गठबंधन को अभी जल्दी नहीं है। समय के साथ सब अपने आप साफ हो जाएगा।दरअसल, पिछले सप्ताह राजग के घटक दलों की ओर से दी गई इफ्तार की दावत से कुशवाहा के कन्नी काटने से उत्साहित तेजस्वी ने उन्हें खुलेआम न्योता दे दिया था, जिससे बिहार की राजनीति गर्म होने लगी थी, किंतु कुशवाहा ने बाद में यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि उनकी विचारधारा गठबंधन की रीति-नीति से मेल नहीं खाती है।हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतनराम मांझी को अपने पाले में करने के बाद तेजस्वी यादव वोटों के गणित का साफ-साफ आकलन कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि कुशवाहा के खेमा बदल लेने से भाजपा के वोट में कुछ फीसद की कमी आ जाएगी और गठबंधन के वोट बैंक में कुछ फीसद का इजाफा हो जाएगा।अभी राजद नेताओं को मुस्लिम, यादव और मांझी समुदाय के वोटरों पर भरोसा है। गठबंधन के साथ कुशवाहा के जुड़ जाने से भाजपा को बेहतर चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में राजद का सामाजिक समीकरण भी दुरुस्त हो जाएगा और वोट बैंक भी। राजग को तोड़कर तेजस्वी यह संदेश भी देना चाहते हैं कि महागठबंधन के पक्ष में लहर है।लोकसभा चुनाव में गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी इतना आसान नहीं होगा। हम के साथ कांग्र्रेस को भी राजद से ज्यादा सीटों की अपेक्षा है। हम की दावेदारी कम से कम पांच सीटों पर है और कांग्रेस भी अपने लिए कम से कम 15 सीटें चाहती है। ऐसे में एक और पार्टनर के बढ़ जाने से राजद के हिस्से में 20 से भी कम सीटें बचेंगी। तेजस्वी को यह मंजूर नहीं होगा। इसलिए कांग्रेस यह तो चाहती है कि गठबंधन के वोट बैंक में इजाफा हो, किंतु सीटों के मामले में खुद को बेअसर रखना चाहती है।

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