समय पालन के लिए भारतीय रेल के टाइमटेबल में बड़े बदलाव की है तैयारी

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रेलवे बोर्ड यात्री ट्रेनों का समय पालन रिकॉर्ड 95 से 100 फीसदी तक करने के लिए समय सारिणी में बड़े बदलाव की तैयारी में है। इस जीरो बेस टाइम टेबल में बताए गए समय के अनुसार रेलगाड़ियां राइट टाइम चलकर गंतव्य तक पहुंचेगी।समय पालन के लिए अब प्रीमियम ट्रेनों को शाम के वक्त (एक स्लॉट) पहले चलाने की योजना है। उनके पीछे मेल-एक्सप्रेस और फिर पैसेंजर ट्रेनें दौड़ेंगी। इससे प्रीमियम ट्रेनें मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों को ओवरटेक नहीं करेंगी। रेलवे बोर्ड समय पालन के मोर्चे पर और कई बड़े बदलाव करने जा रहा है।रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि रेल मंत्री पीयूष गोयल 28 जून को रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के साथ जीरो बेस टाइम टेबल बनाने के लिए बैठक करने जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि ट्रेनों की लेट-लतीफी का स्थायी हल जीरो टाइम टेबल में होगा। इसमें ट्रेनों का समयपालन 95-100 फीसदी करने का फार्मूला होगा। नया टाइम टेबल अगस्त में जारी हो सकता है।जीरो टाइम टेबल में विशेषकर प्रीमियम ट्रेनों (राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, गतिमान, तेजस) को शाम के समय पहले स्लॉट में चलाया जाएगा। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा है। इनमें औसत रफ्तार बनाए रखने के लिए दो इंजन लगेंगे। प्रीमियम ट्रेनों के पीछे मेल-एक्सप्रेस दूसरे स्लॉट (110 किलोमीटर) और पैसेंजर ट्रेनें तीसरे स्लॉट (90-100 किलोमीटर प्रतिघंटा) में चलाई जाएंगी।अधिकारियों का तर्क है कि तेज गति की ट्रेनों (प्रीमियम) के आगे कम रफ्तार ट्रेनों के (मेल-एक्सप्रेस) चलाने से उनको ओवरटेक करने में तकनीकी अड़चने आती हैं। जिससे प्रीमियम ट्रेनों की रफ्तार धीमी करनी पड़ती है। मेल-एक्सप्रेस को स्टेशन आने पर लूप लाइन में खड़ी कर प्रीमियम ट्रेनें आगे भेजी जाती हैं।रेलवे के अधिकारी ने बताया कि जीरो टाइम टेबल में पुराने टाइम टेबल का कोई डाटा नहीं होगा। इसमें अधिकांश ट्रेनों का समय बदल दिया जाएगा। नए टाइम टेबल में ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान का समय कई मिनट अथवा कई घंटे आगे-पीछे किया जाएगा। इसमें मेगा ब्लॉक और ट्रैक नवीनीकरण व मरम्मत के लिए समय का प्रावधान होगा। इसके लिए लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव के समय को कम (दो-तीन मिनट तक) किया जाएगा। तकनीक ठहराव में कोच में जल्द पानी भरने व इलेक्ट्रिकल-मेकेनिकल जांच के समय में कटौती की जाएगी। ट्रेन के गार्ड-ड्राइवर के बदलने का समय 10 मिनट से 30 मिनट का है, इसे दो से तीन मिनट किया जाएगा। पुराने पुल, ट्रैक के कर्व, सेक्शन (दो स्टेशन) पर गति पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाएगा।रेलवे ड्राईवर-गार्ड के लिए वर्किंग टाइम टेबल के नियम को सख्ती से लागू करेगा। इसमें ड्राईवर को दो स्टेशनों के बीच कितनी देर में ट्रेन में पहुंचनी चाहिए इसे रनिंग टाइम पर खरा उतरना होगा। आईआरएलओ के संजय पांधी का कहना है कि 90 फीसदी ड्राईवर रनिंग टाइम पर ट्रेनें नहीं चला पा रहे हैं, क्योंकि उन पर निगरानी करने वाले लोको इंस्पेक्टर मालगाड़ियों के ड्राईवरों को बना दिया जाता है। दशकों पहले उत्तर रेलवे ने ऑपरेशन चेतक लागू किया था। इसमें ट्रेनों की औसत रफ्तार कायम रखने का टाइम टेबल था। इसे अब भुला दिया गया है।
70 फीसदी से नीचे चला गया है वर्तमान में ट्रेनों का समयपालन
50 प्रतिशत ट्रेनें ही समय पर चल पा रही हैं कुछ जोन में
90 फीसदी ड्राईवर टाइम पर ट्रेनें नहीं चला पा रहे हैं

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