सेनाओं के रक्षा खरीद अधिकार बढ़े, 150 करोड़ रुपये तक की खरीद-सीमा हटी

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रक्षा तैयारियों को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए सरकार ने सेना को आवश्यक रक्षा सामग्री की खरीद के लिए वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए हैं। अभी तक सेनाओं को अधिकतम 150 करोड़ रुपये तक की खरीद की अनुमति थी। लेकिन अब इस सीमा को हटा दिया गया है। अब जरूरत पड़ने पर सेना, नौसेना या वायुसेना मुख्यालय डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की आवश्यक रक्षा सामग्री को बिना सरकार की मंजूरी लिए तत्काल खरीद सकेंगी।रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में ‘डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पॉवर टू डिफेंस सर्विसेज-16 (डीएफपीडीएस)’ नियमों में परिवर्तन किया है। इन नियमों के तहत पहली बार दो साल पूर्व सैन्य बलों को अधिकार दिए गए थे कि वे आपात स्थिति में गोला-बारूद और अन्य उपकरणों की खरीद कर सकती है। उरी हमले के बाद यह कदम उठाया गया था। लेकिन तब इसमें खरीद की अधिकतम सीमा 150 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। खबर है कि अधिकतम सीमा तय होने के कारण योजना खास प्रभावी नहीं रही।इस बीच लगातार सीएजी और संसदीय समितियों ने द्वारा सेना के पास महत्वपूर्ण किस्म के गोला-बारूद और उपकरणों की कमी को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। माना जा रहा है कि इसी के चलते नियमों में फिर से बदलाव करते हुए सैन्य बलों की खरीद शक्ति में इजाफा किया गया है। नए नियमों से अत्यंत महत्वपूर्ण किस्म के गोला-बारूद की 46 मदें, उपकरणों और पुर्जों की 10 मदों में खरीद की जा सकेगी। इसके अलावा वायुसेना एवं नौसेना के लिए 28 किस्म की मिसाइलें एवं तारपीडो भी इन प्रावधानों के तहत खरीद जा सकेंगे।तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों को यह खरीद करने का अधिकार होगा। इसके लिए कैपिटल बुकिंग रेवेन्यू प्रोसीजर (सीबीआरपी) रूट से खरीद प्रक्रिया पहले से तय है। इस फैसले से सेनाएं अपनी जरूरत के हिसाब से गोला-बारूद, मिसाइलें, तारपीडो तथा आवश्यक उपकरणों की खरीद कर सकेगी। यह खरीद कम समय में हो सकेगी। इससे देश की युद्ध की तैयारियां मजबूत होंगी।
-हाल में संसदीय समिति ने कहा था कि सेना के 68 फीसदी हथियार पुराने हैं तथा वे युद्ध संग्रहालय में रखने के लायक हैं।
-संसदीय समिति और कैग की कई रिपोर्टों में चिंता जाहिर की गई है कि अत्यधिक महत्वपूर्ण श्रेणी में शामिल 46 किस्म के गोला-बारूद का स्टॉक कम है, जिससे वह दस दिन का युद्ध भी नहीं लड़ सकती। इसकी वजह खरीद प्रक्रिया में विलंब होना बताया गया।
-इसी प्रकार 10 ऐसे उपकरण या पुर्जे हैं, जिनकी उपलब्धता नहीं होने के कारण सैन्य अभियानों पर फर्क पड़ता है। लेकिन सेनाओं को सीधे अधिकार दिए जाने से इनकी उपलब्धता बढ़ेगी।

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