हेलीकॉप्टर न लौटाने के लिए मालदीव से बात करेगा भारत

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सेशेल्स को ड्रोनियर एयरक्राफ्ट देने के बाद भारत मालदीव को भी मनाने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि विदेश एवं रक्षा मंत्रालय के अधिकारी अगले महीने मालदीव से बात करेंगे और हेलीकाप्टर न लौटाने की अपील करेंगे। कोशिश की जा रही है कि इस बाबत पूर्व में हुए समझौते का नवीनीकरण कराया जाए, जिसे मालदीव की तरफ से रोका गया है।बता दें कि भारत ने मालदीव को दो ध्रुव हेलीकॉप्टर तोहफे में दिए थे, जिन्हें हाल में मालदीव ने लौटाने का फैसला किया है। इस बीच मालदीव ने फिर कहा है कि जून के अंत तक भारत अपने दोनों हेलीकॉप्टर वहां से हटा ले। दोनों हेलीकॉप्टरों के साथ नौसेना की दो टीमें भी वहां मौजूद हैं, जो इनका संचालन करती हैं और वहां की नौसेना को प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय मालदीव के संपर्क में है।अगले महीने इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच एक आधिकारिक बातचीत होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस बातचीत के लिए विदेशी एवं रक्षा मंत्रालय के अधिकारी मालदीव जा सकते हैं या मालदीव के दल को भारत भी बुलाया जा सकता है। मूल रूप से बातचीत का एजेंडा यही है कि हेलीकॉप्टरों के बाबत हुए लेटर ऑफ एक्सजेंच (एलओई) को फिर से बहाल किया जाए।बता दें कि एलओई के तहत ये हेलीकॉप्टर दिए गए थे। प्रत्येक दो साल में इसका नवीनीकरण होता है लेकिन इस बार मालदीव ने नवीनीकरण से इनकार कर दिया है। एक हेलीकॉप्टर 2010 में और दूसरा 2016 में दिया गया था। दोनों मालदीव में महत्वपूर्ण स्थानों अड्डू एवं लामू में तैनात हैं। मालदीव की तरफ से एक ड्रोनियर की मांग की गई थी, जिसके पूरा नहीं हो पाना भी माले की नाराजगी की एक वजह बताई जा रही है। उधर, मालदीव को पाकिस्तान की तरफ से विमानों की खरीद के लिए दस लाख डॉलर के कर्ज और चीन के दखल को भी इसके पीछे माना जा रहा है।सूत्रों का कहना है कि माले को ड्रोनियर देने के पूर्व के वादे को भारत पूरा कर सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है लेकिन जब अगले महीने बातचीत होगी तो स्थिति साफ हो जाएगी। दरअसल, सरकार माले से संबंधों को लेकर चिंतित है तथा पुराने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए प्रयास कर रही है।

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