यूपी के शहरों में चलेंगी देश की सबसे ज्यादा मेट्रो

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कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रो को मंजूरी के साथ यूपी देश का ऐसा राज्य बन गया है जिसके सबसे ज्यादा शहरों में मेट्रो चलेंगी। अब तक केंद्र ने छह शहरों में मेट्रो चलाने की मंजूरी दे दी है जबकि तीन शहरों इलाहाबाद, वाराणसी और गोरखपुर में भी मेट्रो चलाने का आधारभूत काम जोरों पर है। कानपुर, मेरठ और आगरा में यह परियोजना 43 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसे वर्ष 2024 में पूरा किया जा सकेगा।यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बना गया है जहां नौ शहरों में मेट्रो रेल का खाका खींचा गया। लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद में मेट्रो रेल चलने लगी है। लखनऊ में पहला चरण पूरा हो चुका है और 8.5 किमी में मेट्रो चल रही है। दूसरा ‌व अंतिम चरण 2019 में पूरा होगा। गाजियाबाद में मेट्रो का दिलशाद गार्डेंन से नया बस अड्डा गाजियाबाद तक 9.41 किमी का विस्तार हो रहा है।
UP: अनूप पांडेय 12 अफसरों को बाइपास कर बने प्रदेश के मुख्य सचिवकेंद्र ने कानपुर, मेरठ व आगरा के प्रस्ताव को हरी झंडी देकर यूपी को देश के नक्शे में सबसे ऊपर ला दिया है। देश में ऐसा कोई राज्य नहीं है जिसके नौ शहरों में मेट्रो के प्रोजेक्टों पर काम हो रहा हो। केंद्र से मंजूरी मिलने के साथ आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके शिलान्यास के साथ ही टेंडर प्रक्रिया तेजी से पूरी करनी शुरू कर दी है। कोशिश है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सभी का काम पूरा किया जा सके।राज्य सरकार मेट्रो रेल कारपोरेशन का भी गठन कर देगी। इसी के साथ मेट्रो सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के द्वार खुलेंगे। मोटे अनुमान के मुताबिक 2000 से ज्यादा युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों को नौकरी मिलना तय है। इस पर कैबिनेट में फैसला हो चुका है। जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।अब गोरखपुर, इलाहाबाद व वाराणसी में मेट्रो चलाने के लिए डीपीआर नए सिरे से बनाया जा रहा है। इसे भी राज्य सरकार जल्द मंजूरी देगी और बाद में केंद्र को भेजा जाएगा। इन शहरों में मेट्रों की शुरुआत पूर्वांचल में विकास की नई रफ्तार को जन्म देगी। इनमें से दो वाराणसी जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र है तो वहीं गोरखपुर से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ते हैं। सियासी नजरिये से इन दोनों शहरों में मेट्रो का चलना अहम होगा। वहीं इलाहाबाद धार्मिक नगरी के रूप में महत्वपूर्ण है। यहां कुंभ आदि के दौरान मेट्रो के जरिए विकास का नया खाका खींचने की कोशिश हो रही है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के शहरों में बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा देना चाहते हैं। इसमें मेट्रो रेल के अलावा सिटी बसों की सुविधा देने की दिशा में काम चल रहा है। प्रदेश के नौ शहरों में जहां मेट्रो चलाने पर काम चल रहा है, वहीं पांच शहरों लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा व गाजियाबाद में इलेक्ट्रानिक बसें चलाने की तैयारी है। इसका मकसद शहरी लोगों को ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
लखनऊ मेट्रो
अमौसी से मुंशी पुलिस तक 23 किमी
कुल लागत 6880 करोड़
कानपुर मेट्रो
आईआईटी से नौबस्ता व कृषि विवि से बर्रा- 8—-32.38 किमी
कुल लागत 18307 करोड़
आगरा मेट्रो
सिंकंदरा से ताज ईस्ट गेट व कालिंदी विहार——-30किमी
कुल लागत 13910 करोड़
मेरठ मेट्रो
परतापुर से मोदीपुरम व जागृति विहार एक्सटेंशन तक—-32.95 किमी
कुल लागत 14401 करोड़
प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण का कहना है कि केंद्र ने कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रों को मंजूरी दे दी है। गोरखपुर, वाराणसी और इलाहाबाद में मेट्रो रेल चलाने के लिए डीपीआर बनाने का काम चल रहा है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे जल्द ही केंद्र को भेज जाएगा। राज्य सरकार यूपी में मेट्रो रेल चलाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

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