पटना का कोई कोना साफ नहीं, हेरा-फेरी में व्यस्त अधिकारी नहीं करते हैं कोई काम

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राजधानी पटना में फैली गंदगी और अतिक्रमण को लेकर पटना हाई कोर्ट ने नाराजगी दिखाते हुए कहा कि कोई भई अधिकारी काम नहीं करते है।
पटना । राजधानी पटना में फैली गंदगी और अतिक्रमण को लेकर पटना हाई कार्ट ने काफी नाराजगी दिखाई है। राज्य के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव और पटना के नगर आयुक्त से पटना हाईकोर्ट ने सीधा सवाल किया कि शहर को कोई कोना बताइए, जहां सबकुछ चकाचक हो। स्वच्छता पर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने आए आयुक्त से न्यायाधीश ने कहा कि वर्षो से पटना में रह रहा हूं। कोई एक मोहल्ला ऐसा नहीं, जहां अतिक्रमण, गंदगी, जलजमाव जैसी कोई न कोई दिक्कत न हो।
न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हो रही। न्यायाधीश ने कहा कि मैं विगत 36 साल से पटना से जुड़ा हूं। पहले वकील था। आज जज हूं। मैंने कोई ऐसा मोहल्ला नहीं देखा, जो समस्यामुक्त हो। अधिवक्ता शंभु शरण सिंह की शहर की नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने से संबंधित लोकहित याचिका को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद एवं पटना नगर निगम के आयुक्त को हाजिर होने के कहा था। कोर्ट ने एसएसपी को भी तलब किया था, किन्तु वे नहीं आ सके। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि एसएसपी ट्रैफिक में फंसे गए हैं। न्यायाधीश ने कहा कि हलफनामा और कारण बताओ नोटिस का जवाब बहुत देख लिया। सब कागजी मामला है। नागरिक सुविधाओं को लोगों के बारे में सोचने की फुरसत नहीं। वह केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर, हेराफेरी जैसे कायरें में व्यस्त हैं। नगर निगम के निर्वाचित सदस्य भी आपसी विवाद में ही समय काट लेते हैं। उन्हें कौन समझाए कि यहां की पब्लिक कितनी परेशान है। खंडपीठ के समक्ष पटना के नगर आयुक्त अनुपम कुमार सुमन ने कहा कि उन्हें छह से लेकर नौ महीने तक समय मिल गया, तो वह शहर को बदल देंगे। इसपर कोर्ट ने नाराजगी जताई। न्यायाधीश ने कहा कि आप शहर को क्या बदलेंगे, सरकार आपको जरूर बदल देगी। यही होता आया है। जब तक आप कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाएंगे, तब तक राज्य सरकार आपको बदल देगी। फिर कोई नया आयुक्त आ जाएगा। उन्हें जब तक सारी बात समझ में आएगी तब तक वह हट जाएंगे। यह मेरा पुराना अनुभव है। आप कुछ कर भी नहीं सकते। अधिकारियों में दूरदर्शिता का अभाव है। दीर्घकालिक योजना नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि पटना देश की सबसे गंदी राजधानी है। पटना स्टेशन से बाहर निकलते ही सबकुछ दिख जाएगा। उदाहरण के लिए आशियाना मोड़ से मजिस्ट्रेट कॉलोनी तक जाने वाली सड़क को ही देखिये। पहले यहां एक नहरनुमा नाला हुआ करता था। उसे पूरी तरह से ढककर सड़क बना दिया गया। यदि वह नहर भर गया तो उसकी सफाई कैसे होगी, यह समझ के बाहर है। सुनवाई में नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव एवं आयुक्त ने कहा कि फंड की कमी नहीं है। कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि छह सप्ताह के बाद यह अधिकारी कार्ययोजना प्रस्तुत कर अदालत को जानकारी दें।

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