पीएम मोदी बोले- नौकरियों की कमी नहीं, बस वास्तिवक आंकड़ा नहीं है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने 2014 में सत्ता संभालने पर भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र नहीं लाए, क्योंकि उससे लोगों की परेशानी कम करने के बजाय बढ़ जाती। एक पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आगे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार ने कई राजनीतिक आरोपों को बदार्श्त करते हुए राजनीतिक नुकसान को स्वीकार किया। अर्थव्यवस्था में रोजगार की कमी के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रोजगार को लेकर आंकड़े के अभाव के कारण यह मुद्दा है।
मोदी ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था में विघटन का ब्योरा अविश्वसनीय था। इससे चारों तरफ संकट गहराने की संभावना थी। 2014 में उद्योग में पलायन का दौर था। भारत पांच कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था। विशेषज्ञों का मानना था कि ब्रिक्स से ‘आई’ का लोप हो जाएगा। लोगों में हताशा और निराशा का माहौल था।”
उन्होंने कहा, “अब ऐसे हालात में नुकसान के जटिल तथ्यों को लेकर श्वेत पत्र लाने के बारे में कल्पना कीजिए। यह परेशानियों को कम करने के बजाय उसको और कई गुना बढ़ा देता।” मोदी ने यह बात 2014 में अर्थव्यवस्था के हालात पर श्वेत पत्र लाने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही। पीएम मोदी कहा, ”हमारे प्रतिद्वंद्वी निश्चित रूप से अपनी रूचि के हिसाब से तस्वीर बनाने के लिये अवसर का उपयोग करेंगे। रोजगार के मुद्दे पर आरोप लगाने को लेकर हम अपने प्रतिद्वंद्वियों पर आरोप नहीं लगाते। आखिर किसी के पास रोजगार को लेकर वास्तिवक आंकड़ा नहीं है। रोजगार को आंकने का जो पंरपरागत तरीका था, वह इतना बेहतर नहीं था कि जिससे नये भारत की नई अर्थव्यवस्था में सृजित हो रहे नये रोजगार का पता लगाया जा सके। मोदी ने कहा कि गांव स्तरीय तीन लाख साझा सेवा केंद्र, 15,000 स्टार्टअप, 48 लाख नये उद्यमियों का पंजीकरण तथा मकानों, रेलवे तथा राजमार्गों के निर्माण में रोजगार सृजित हुए। उन्होंने कहा कि सितंबर 2017 से अप्रैल 2018 तक संगठित क्षेत्र में 41 लाख रोजगार सृजित हुए। यह ईपीएफओ के ‘पेरोल आंकड़े से पता चलता है। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर राजनीतिक बहस निरर्थक है। हमारे पास राज्यों की तरफ से रखे गये आंकड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ”उदाहरण के लिये पूर्व कर्नाटक सरकार ने 53 लाख रोजगार सृजित करने का दावा किया। पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि उनके पिछले कार्यकाल में 68 लाख रोजगार सृजित हुए। अब अगर राज्य अच्छी संख्या में रोजगार सृजित कर रहे हैं, तो क्या यह संभव है कि देश में रोजगार सृजित नहीं हो रहे? क्या यह संभव है कि राज्यों में तो नौकरी सृजित हो रही है लेकिन केंद्र में रोजगारविहीनता की स्थिति है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार कच्चे माल की लागत में कमी लाकर, उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित कर, उत्पादकता बढ़ाकर तथा आय सृजन के अन्य अवसर सृजित कर 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिये काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में कई बारूदी सुरंगे थीं और उनकी सरकार ने इस कष्टकारी सच को स्वीकार किया, पहले ही दिन से चीजों को स्थिर करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू किया, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल के लिए दुरुस्त करने के लिए मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा, “हमने कई राजनीतिक आरोपों को बदार्श्त किया। हमने राजनीतिक नुकसान को स्वीकार किया लेकिन यह सुनिश्चित किया हमारे देश को कोई नुकसान न हो। सरकार के दृष्टिकोण के सकारात्मक परिणाम आज हरकोई देख रहा है।” उन्होंने कहा, “आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। विदेशी निवेश अब तक के ऊंचे स्तर पर है। जीएसटी ने कर व्यवस्था में क्रांति ला दी है। भारत पहले के बजाय व्यवसाय के लिए बेहतर ठिकाना बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम भरोसे और आशावाद का अभूतपूर्व स्तर देख रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राजनीति को प्राथमिकता देने के बजाय भारत को प्राथमिकता दी।

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