बुराड़ी हादसे की पटकथा लिखने वाला लेता था ‘मृत पिता’ से आदेश, घर से मिले डायरी से हुआ खुलासा

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बुराड़ी हादसे में पुलिस को मिली एक डायरी से कई सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस ने बताया कि घर से मिली डायरी से पता लगा है कि इस हादसे की पटकथा लिखने वाला शख्त ललित भाटिया अपने ‘मृत पिता’ से बात करता था। ललित भाटिया सहित उनके परिवार के 11 सदस्यों के शव रविवार के दिन उनके घर में मिले थे। इनमें में से 10 लोगों के शव लोहे के जाल से लटके हुए थे, जबकि एक महिला का शव दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ा हुआ था। इन सभी के मुंह-आंख पर पट्टी बंधी थी और इनके हाथों को पीछे की ओर बांधा हुआ था। दिल्ली पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘ललित भाटिया ने अपने नोट्स में लिखा है कि वह सपने में अपने मृत पापा को देखता था। ललित अपने पापा से सपने में बात भी करता था और उसके पिता उसे प्रॉपर्टी, बिजनेस और परिवार से संबंधित आदेश देते थे। घर में जो भी धार्मिक अनुष्ठान ललित करता था, उनके लिए डायरी में लिखा हुआ है कि यह ऊपर से आदेश हैं।’50 पेज के इन नोट्स से यह पता लगता है कि वह साल 2015 से ललित भाटिया लिख रहे थे। जांच करने वाले एक अधिकारी ने बताया, ‘उन की हैंडराइटिंग ललित की लिखी हुई मालूम हुई है। इन नोट्स पर जगह और तारीख भी लिखी हई हैं। इन्हें देखने से पता लगता है कि बीच में नोट्स लिखने बंद हो गए थे, लेकिन जनवरी से ज्यादा नोट्स लिखे जाने लगे। आखिरी नोट्स 25 जून को लिखा गया था।’ साथ ही बताया कि उन नोट्स में जो भी लिखा था परिवार ने वहीं स्ट्पेस किए हैं और इनके लिए उन्होंने रिहर्सल भी की। इसके अलावा एक अधिकारी ने बताया, ‘नोट्स में बार-बार ‘वट तपस्या’ के बारे में लिखा हुआ था। इसमें बरगद के पेड़ की लटकती हुई जड़ों की पूजा करने के लिए विशेष तौर पर कहा गया था। नोट्स में यह भी लिखा था कि तपस्या करने वाले लोग खुद बरगद की जड़ों की तरह लटक सकते हैं।’बता दें, पुलिस का मानना है कि दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों द्वारा सामूहिक मौत की दिल दहला देने वाली कहानी की पटकथा छोटे भाई ललित ने लिखी थी। इसकी शुरुआत उसने तीन साल पहले की थी। यह बात क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में सामने आई है। तीन साल से मौन था: जांच के दौरान डायरी के पन्नों को एक-एक कर पलट रही क्राइम ब्रांच ने जांच आगे बढ़ाई तो यह बात सामने आई है कि ललित वर्ष- 2015 से ही यह डायरी लिख रहा था। वह तब से मौन रहता था। वह कुछ दिन के अंतराल पर डायरी में कुछ न कुछ धार्मिक आदेश की तरह लिख देता था। इस डायरी में लिखी लिखावट की जांच कराने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम हैंड राइटिंग विशेषज्ञ की मदद लेगी। इस बारे में क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर आलोक कुमार ने बताया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनकी बारीकी से जांच की जा रही है। डायरी में राज : ज्वाइंट कमिश्नर ने यह भी खुलासा किया कि जिस तरह से सामूहिक मौत को अंजाम दिया गया है, उसका जिक्र 26 जून की तरीख में किया गया है। उसमें कान में रूई डालने, हाथ-मुंह बांधने से लेकर इस प्रक्रिया व नियम को मंगलवार, शनिवार व रविवार के दिन करने की बात लिखी गई थी, ठीक उसी अंदाज में इस कांड को अंजाम दिया गया।

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