राहत: किसानों को लाभकारी एमएसपी के लिए 15 हजार करोड़

0
87

मोदी सरकार किसानों को फसलों का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 15 हजार करोड़ खर्च करेगी। सरकार इस बार किसानों को खेती की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देना चाहती है। ये दोनों फैसले बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में लिए जा सकते हैं, ऐसा एक वरिष्ठ नौकरशाह और इन फैसलों से जुड़े अधिकारी का कहना है। एमएसपी को लेकर सरकार की रणनीति के बारे में खुलासा बुधवार की बैठक के बाद होगा। केंद्र की नई एमएसपी नीति में ये साफ होगा कि किसानों को उनकी लागात का कम से कम डेढ़गुना दाम मिले। इससे किसानों को खेती से कम से कम से 50 फीसदी का लाभ मिल सकेगा। साल 2018-19 के बजट में पहली बार खरीफ फसलों के लिए उच्च समर्थन मूल्य देने की बात कही गई थी। सरकार साल में दो बार एमएसपी की एलान करती है। यह रब्बी और खरीफ फसलों की खेती के दौरान होता है। पर साल 2017-18 में किसानों को अपने लागात से 50 फीसदी से भी कम का लाभ मिला। इसका बड़ा कारण रहा कि किसान अपने फसलों का एमएसपी भी नहीं प्राप्त कर सके। वहीं 2017 के खरीफ के मौसम में भी किसानों का लाभ काफी नकारात्मक रहा। आईसीआरआईईआर के प्रोफेसर अशोक गुलाटी की गणना के अनुसार 2016-17 में किसानों को ज्वार में -18 फीसदी, सूरजमुखी में -13 फीसदी, मूंगफली में -4 फीसदी, रागी में -20 फीसदी, मूंग में -7 फीसदी और उड़द में -4 फीसदी दाम मिले। इसलिए सरकार अब 15 हजार करोड़ के भारी भरकम फंड के इंतजाम के साथ चाहती है कि इस किसानों को इस तरह का घाटा नहीं उठाना पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों को अनुशंसा के मुताबिक एमएसपी दिलाने का प्रयास करेगी। वहीं 2018-19 में गन्ना किसानों को भी अच्छे दाम दिलाने की कोशिश होगी। साल 2018-19 में गन्ने की कीमत ज्यादा होगी वहीं किसानों को लाभांश दिलाने की भी कोशिश होगी। इस साल खरीफ फसलों की बुवाई का काम जारी है। पर 30 जून के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में 46 फीसदी कम बुवाई हुई है। हालांकि जुलाई में इसका आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here