ये हैं टीवी के वो जासूस जिन्होंने चुटकियों में सुलझा दी उलझी हुई गुत्थियां

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जासूसी घटनाओं के बारें में जनना जितना रोमांचित लगता है उतना ही इन घटनाओं को टीवी स्क्रीन पर देखना भी मजेदार लगता है। अक्सर आपने टीवी पर दिखाए जाने वाले सीरियलों के विषय में नकारात्मक टिप्पणी करते हुए लोगों को सुना होगा। लेकिन जब बात जासूसी और खोज (investigation) पर आधारित धारावाहिक की होती है तो लोगों की दिलचस्पी एकदम से जग जाती है। अपने बचपन में कई जासूसी सीरियल देखे होंगे जिनमें से कई पसंदीदा भी रहे होंगे। टेलीविजन और फिल्मों में जासूसी कारनामे देखकर मन में एक सवाल पैदा होता है कि आखिर ये जासूस उलझी हुई समस्याओं और आपराधिक गुत्थियों को सुलझाते कैसे हैं? तो आइए रहस्य, थ्रिलर और और एक केस को सुलझाने के अलग तरीकों से दिखाए जाने वाले टीवी जासूसों की बात करते हैं जो अपने सूझ-बूझ और तेज दिमाग से बड़े-बड़े केस सुलझा लेते थे। यह सीरियल अपने समय का सबसे प्रसिद्ध जासूसी सीरियल रहा है जो प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास पर आधारित था, इस सीरियल में रजत कपूर ने व्योमकेश बक्शी की प्रमुख भूमिका निभाई थी। यह सीरियल अपने जमाने में इतना हिट रहा था की अभी कुछ ही समय पूर्व इस सीरियल पर आधारित फिल्म भी आ चुकी है जिसमे सुशांत सिंह राजपूत ने मुख्य भूमिका निभाई थी । भारतीय जासूसों की दर्शकों में लोकप्रियता की चरम सीमा को पहली बार जासूस ‘करमचंद’ के साथ देखा गया। साल 1985 में पहली बार भारतीय दर्शकों के बीच पेश किए गए ‘करमचंद’ का टाइटल इसके मुख्य पात्र जासूस ‘करमचंद’ पर आधारित था, जो अपनी सहायक किट्टी के साथ मिलकर हत्या के रहस्यों से पर्दा उठाता है। जासूस ‘करमचंद’ का निर्देशन पंकज पाराशर ने किया था। भारत में सबसे लोकप्रिय जासूसी सीरियल में से एक है जिसके एक-एक किरदार को घर-घर पहचाना जाता है और हाल ही में इस सीरियल ने इंडियन टेलीविज़न में अपने 16 साल पुरे किए है और अभी भी लोकप्रिय है। इसमें एसीपी प्रद्युम्न, सीनियर इंस्पेक्टर अभिजीत और इंस्पेक्टर दया फोरेंसिक डॉक्टर की मदद से केस का हल निकालते हुए देखा जाता था। रोनित रॉय की बेहतरीन भुमिकाओं में से एक रही है ‘के डी पाठक’ की भूमिका के लोग दिवाने हैं। रोनित ने यह भूमिका धारावाहिक ‘अदालत’ में निभाई थी। टेलीविज़न के इतिहास में सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाला अदालती मुकदमो का सीरियल रहा है जो 2010 से 2015 तक प्रसारित हुआ। कॉमेडी से भरपुर ‘राजा और रेंचो’ की जासूसी अब तक की सबसे बेस्ट जासूसी सीरियल रही है। इस सीरियल में पहली बार एक इंसान और बंदर की जोड़ी को केस सुलझाते हुए दिखाया गया था। इस सीरियल में वेद थापर ने जासूस की भूमिका निभाई थी और बन्दर का नाम रेंचो दिया गया था | अपने पहले एपिसोड से ही ‘तहकीकात’ दर्शकों में बेहद लोकप्रिय हो चुका था। इसमें विजय आनंद (देव आनंद के भाई) सेम डी’सिल्वा की भूमिका में थे। उनके अलावा सौरभ शुक्ला गोपीचंद के किरदार में नजर आए। 1994 के मई में दूरदर्शन पर इसकी शुरुआत हुई थी। ‘सबूत’ भारत का पहला ऐसा डिटेक्टिव सीरियल था जिसमें की महिला ने मुख्य जासूस का किरदार निभाया था | इस सीरियल में अनीता कंवर ने सीबीआई इंस्पेक्टर के.सी. का रोल निभाया था जो बहुत ही लोकप्रिय रहा था | सुदेश बेरी अभिनीत सीरियल ‘सुराग– द क्लू’ भी अपने समय का लोकप्रिय सीरियल रहा है जिसमें सुदेश बेरी ने सीआडी इंस्पेक्टर ‘भारत’ की भूमिका निभाई थी। साल 2005 में चैनल स्टार वन पर प्रसारित किए गए इस क्राइम शो में विशेषज्ञ खोजकर्ताओं की टीम विभिन्न केसों को सुलझाती है। जैसा की नाम से स्पष्ट है यह मुंबई पुलिस की एक स्पेशल टीम है जो विशेष केसों की जांच करने के लिए गठित की गई थी। इस सेरियल को लिखा था बिजेश जयरंजन और डायरेक्ट किया था नन्द कुमार काले और सत्यम त्रिपाठी ने ।

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