कैलाश मानसरोवर यात्रा: 1200 से ज्यादा फंसे भारतीय यात्री सुरक्षित निकाले गए

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नेपाल के पर्वतीय सिमीकोट क्षेत्र से 1,200 से अधिक भारतीय तीर्थयात्रियों को शुक्रवार को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया। यह जानकारी यहां भारतीय दूतावास ने दी। इसके साथ ही तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौटते समय खराब मौसम के चलते हिल्सा क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं। सिमीकोट से सुरक्षित निकाले गए तीर्थयात्रियों को नेपालगंज और सुरखेट पहुंचाया गया है। ये दोनों नगर भारतीय सीमा के नजदीक हैं और दोनों जगह बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और अवसंरचना सुविधाएं हैं। भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा, ‘आज तक ठोस प्रयासों के जरिए 1,225 फंसे हुए तीर्थयात्रियों को सिमीकोट से हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालकर नेपालगंज और सुरखेट पहुंचाया गया है। हेलीकॉप्टर के जरिए सुरखेट पहुंचाए गए तीर्थयात्रियों को नेपालगंज ले जाने के लिए बस सेवा भी लगाई गई है। दूतावास ने हिल्सा में फंसे 675 तीर्थयात्रियों को हेलीकॉप्टर से सिमीकोट ले जाने और फिर आगे नेपालगंज पहुंचाने के लिए टूर ऑपरेटरों के साथ भी काम किया।’बयान के मुताबिक तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया के दौरान 74 व्यावसायिक उड़ानें संचालित की गईं और इसके अतिरिक्त दूतावास ने नेपाल सेनाके हेलीकॉप्टरों के साथ निजी हेलीकॉप्टरों- एमआई-16 की भी सेवा ली जिन्होंने हिल्सा-सिमीकोट-नेपालगंज के दुरूह क्षेत्रों में 142 से अधिक उड़ानें भरीं। इससे पहले शुक्रावार को भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि तिब्बत सीमा के नजदीक हिल्सा में फंसे तीर्थयात्रियों की संख्या अब ‘लगभग ना के बराबर’ है। अधिकारी ने कहा कि सुरखेट और नेपालगंज भेजे गए अनेक तीर्थयात्री पहले ही भारत के लिए अपनी आगे की यात्रा शुरू कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी राज्य परिवहन बसों की तैनाती कर प्रक्रिया में मदद की है। भारतीय दूतावास ने कहा था कि 275 तीर्थयात्रियों को गुरुवार हिल्सा से सुरक्षित निकाला गया था जिससे पिछले तीन दिनों में सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए तीर्थयात्रियों की संख्या 675 हो गई। दूतावास ने शुक्रवार के तीर्थयात्रियों के लिए गुरुवार को एक संशोधित परामर्श भी जारी किया था और कहा था कि वे यात्रा पर बढ़ने से पहले चिकित्सा जांच करा लें। सोमवार को खराब मौसम के चलते हिल्सा और सिमीकोट में 1,500 से अधिक तीर्थयात्रियों के फंसने के बाद दूतावास ने राहत अभियान शुरू किया था। साथ ही कहा गया, ‘राहत अभियान के तहत दूतावास ने अपने अधिकारियों और प्रतिनिधियों को हिल्सा, सिमीकोट, नेपालगंज और सुरखेट प्रभावित क्षेत्रों में बुजुर्ग और बीमार तीर्थयात्रियों को मदद तथा चिकित्सा जांच उपलब्ध कराने के लिए दवाओं के साथ भेजा और तैनात किया।’दूतावास ने तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों के लिए एक हॉटलाइन भी स्थापित की थी जिसमें तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम भाषा बोलने वाला स्टाफ भी शामिल है। चीन के अधीन तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों के लिए पवित्र तीर्थस्थल है और हर साल सैकड़ों भारतीय प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में इस यात्रा पर जाते हैं।

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