जापानी कार कंपनी निसान मोटर ने दिया प्रदूषण और माइलेज का गलत मानक, शेयर गिरे

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    जापान की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी निसान मोटर ने सोमवार को कबूल किया कि उसने कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण से जुड़े) और माइलेज के आंकड़े जानबूझकर बदल दिए थे। फॉक्सवैगन के बाद निसान ऐसा करने वाली दूसरी कंपनी है। पिछले साल जापान में जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि कंपनी की गाड़ियों में फ्यूल एमिशन और माइलेज के जो आंकड़े दिए जा रहे हैं वह सही नहीं है। 3इस खुलासे के बाद टोक्यो में निसान के शेयरों में 4.56 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,003.5 येन पर कारोबार करता नजर आया। यह अप्रैल 2017 के बाद से सबसे निचला स्तर है। इससे पहले अक्तूबर में निसान ने करीब 12 लाख गाड़ियों को वापस मंगाने पर मजबूर होना पड़ा था। वजह थी कर्मचारियों द्वारा स्वीकारना कि गाड़ियों की जांच पूरी हुए बिना ही बाजार में भेजना। इससे पहले फॉक्सवैगन ने भी माना था कि प्रदूषण जांच को चकमा देने के इरादे से उसने 1.1 करोड़ कारों के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की थी। साल 2015 में एक अमेरिकी एजेंसी ने फॉक्सवैगन की कारों में गड़बड़ी पकड़ी थी। इसके बाद जर्मनी की अथॉरिटीज ने फॉक्सवैगन पर 1 अरब यूरो (करीब 1.18 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया था। अभी भी फॉक्सवैगन जर्मनी और विदेशों में कई जांचों का सामना कर रही है। इसी के तहत फॉक्सवैगन की लग्जरी ब्रैंड ऑडी के चीफ एग्जीक्यूटिव रूपर्ट स्टैडलर को गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल कोबे स्टील ने माना था कि उसने निसान और टोयोटा की कारों में इस्तेमाल होने वाले जिस एल्यूमीनियम और कॉपर प्रोडक्ट की सप्लाई की है उसकी मजबूती और टिकाऊपन के बारे में गलत डेटा पेश किया। कंपनी ने स्वीकार किया कि सितंबर 2016 से अगस्त 2017 के बीच एल्यूमीनियम और कॉपर को गलत जानकारी वाले लेबल के साथ बेचा गया।

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