कभी मुंबई में गोलगप्पे बेचता था यह युवा क्रिकेटर, अब सचिन ने गिफ्ट में दिया अपना बल्ला

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सचिन तेंदुलकर भले ही क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन वह किसी ना किसी बात की वजह से अभी भी सुर्खियों में बने रहते हैं। रिटायरमेंट के बाद भी सचिन की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने एक बार फिर कुछ ऐसा किया है, जिससे उनके फैंस गदगद हो गए हैं। दरअसल, सचिन तेंदुलकर ने एक युवा क्रिकेटर को अपना बल्ला गिफ्ट में देकर फैंस को अपना मुरीद बना लिया है। गौरतलब है कि किसी भी क्रिकेटर को अपने ‘किट बैग’ से बहुत ही ज्यादा प्यार होता है और वह ऐसे ही किसी को भी अपना सामना गिफ्ट में नहीं देता। अगर सचिन जैसे क्रिकेट के इतने बड़े खिलाड़ी एक युवा को अपना बल्ला गिफ्ट में दिया है, तो जरूर उसमें कुछ खास बात होगी। दरअसल, सचिन ने जिस युवा क्रिकेटर को अपना बल्ला गिफ्ट में दिया है, वह भारत के अंडर-19 टीम में खेलने वाले यशस्वी जायसवाल हैं। यशस्वी का श्रीलंका दौरे गई भारत की अंडर-19 टीम में चयन हुआ है। सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर भी इस टीम के सदस्य और यशस्वी के बहुत अच्छे दोस्त हैं। सचिन तेंदुलकर ने यशस्वी जायसवाल को अपना बैट गिफ्ट में दिया और उनसे अपने डेब्यू मैच में इसी बल्ले से खेलने की गुजारिश भी की। सचिन तेंदुलकर से एक बार मिलना चाहते थे
भारत की अंडर-19 टीम दो 4 दिवसीय मैच खेलने के लिए श्रीलंका दौरे पर है। सचिन के पुत्र अर्जुन तेंदुलकर भी इस टीम का हिस्सा हैं। यशस्वी और अर्जुन तेंदुलकर बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी में लगे कैंप में एक साथ ही थे और दोनों एक ही कमरे में रहते भी थे। यशस्वी जायसवाल एक बार सचिन तेंदुलकर से मिलना चाहते थे, ऐसे में अर्जुन तेंदुलकर उन्हें अपने घर बांद्रा ले गए। सचिन ने यशस्वी से उनके खेल के बारे में बातचीत की और उन्हें अहम टिप्स भी दिए। इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने यशस्वी को अपना बल्ला गिफ्ट किया और उसपर एक खास संदेश भी लिखा। यशस्वी जायसवाल ने इस साल कूच बिहार ट्रॉफी में 500 से ज्यादा रन बनाए थे। गौरतलब है कि यशस्वी जायसवाल बेहद गरीब परिवार से आते हैं। दो भाइयों में छोटे यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता भदोही में ही एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। यशस्वी बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट का सपना लेकर मुंबई पहुंच गए थे। वह पहले एक डेयरी में काम करते थे और वहीं सोते थे। डेयरी मालिक ने बाद में उन्हें नौकरी से निकाल दिया। यशस्वी उस वक्त महज 11 साल के थे। उन्होंने दशहरा पर्व के दौरान आजाद मैदान में लगने वाले मेले में गोलगप्पे तक बेचे हैं।

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