पाक चुनाव : घोषणा पत्र में आतंकवाद से लड़ने का वादा, सेना की सीधी भूमिका नहीं

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पाकिस्तान की मुख्य पार्टियों ने अपने-अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया है कि 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव के बाद सत्ता में आने पर वे आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने स्वीकार किया है कि इन बुराइयों ने उनके देश को दुनिया में अलग-थलग कर दिया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज ने अपने अपने घोषणापत्र में आतंकवाद , कट्टरपंथ और चरमपंथ को देश के लिए अभिशाप बताया है। उन्होंने मुस्लिम बहुल इस देश में हजारों मदरसों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का भी वादा किया है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने सोमवार को अपना चुनाव घोषणापत्र जारी किया। इसमें पार्टी ने कहा है कि आतंकवाद से न सिर्फ पाकिस्तानी नागरिकों की बड़े पैमाने पर जान जा रही है, बल्कि कभी सहिष्णु रहा समाज भी असहिष्णुता, डर और नफरत में तब्दील हो रहा है। पार्टी का रुख सहिष्णुता की भावना बहाल करने और पाकिस्तान के सभी नागरिकों के बीच स्वीकार्यता के प्रति प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने पिछले हफ्ते जारी अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ इसकी कुबार्नियों के बावजूद पाकिस्तान वैश्विक समुदाय में अलग थलग बना हुआ है। पार्टी ने कहा कि सत्ता में लौटने पर वह आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त कराए गए क्षेत्र को अराजक स्थानों में तब्दील नहीं होने देने को सुनिश्चित करेगी। अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के घोषणापत्र में कहा गया है कि पार्टी सब की परस्पर सहमति वाली एक प्रणाली के जरिए मदरसों का उपयुक्त पंजीकरण सुनिश्चित करेगी। पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार को कहा कि देश की चुनाव प्रक्रिया में उसकी कोई सीधी भूमिका नहीं होगी। देश में 25 जुलाई को होने वाले चुनाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोजन के लिए सेना ने 3.71 लाख सैनिकों की मतदान केंद्रों पर तैनाती की बात कही है। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा, सशस्त्र बल चुनाव के आयोजन में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। दरअसल सेना पर ऐसे आरोप लग रहे थे कि वह मीडिया और सरकार पर चुनाव में हेरफेर करने का दबाव बना रही है। गफूर ने कहा, सशस्त्र बल सिर्फ पाकिस्तान चुनाव आयोग की मदद करेगा क्योंकि आयोग ने सेना की मदद मांगी है। हमें आयोग की मदद गैरराजनीतिक और तटस्थ तरीके से करना है। हम चुनाव से जुड़ी मुद्रित सामग्री को अपने पास नहीं रखेंगे। इस तरह के कार्य चुनाव आयोग के कर्मचारी करेंगे। हमारी शीर्ष प्राथमिकता देश में शांति और सुरक्षा बनाने की है। पाकिस्तान की स्थापना के बाद से यहां सेना मजबूत स्थिति में रही है। पाकिस्तान में नीतियां निर्धारित करने में इसकी अहम भूमिका रही है। लंबे समय तक यह देश की सत्ता पर काबिज भी रही है। प्रवक्ता ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है जब चुनावी प्रक्रिया की देखरेख के लिए सेना तैनात की जाएगी।

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