ट्रंप की नीति ने दिया गहरा जख्म, गोद में आकर भी मां-बाप को नहीं पहचान पाए बच्चे

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शरणार्थियों से उनके बच्चों को छीन लेने की नीति ने परिजनों को गहरा जख्म दिया है। इस नीति के लिए ट्रंप प्रशासन को पूरी दुनिया से आलोचना झेलनी पड़ रही है। आलोचना के बाद ट्रंप ने शरणार्थियों और उनके बच्चों को अलग रखने की नीति को वापस जरूर ले लिया है लेकिन इसका बुरा असर चार माह बाद अब देखने को मिल रहा है। कैलिफोर्निया की कोर्ट के आदेश के बाद शरणार्थियों को अब उनके बच्चों से मिलाया जा रहा है। बच्चे अपने मां-बाप को भूल चुके हैं। वे अपने माता-पिता को पहचान ही नहीं पा रहे। मां-बाप के बजाय बच्चे उन समाजसेवी महिलाओं के पास जाने की जिद कर रहे हैं जिन्होंने शरणार्थी शिविर में बच्चों की सेवा की। बताते चलें कि चार महीने पहले ट्रम्प प्रशासन ने गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने के आरोप में देश की दक्षिण पश्चिम-सीमा पर 2000 बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर दिया था। ट्रंप की इस नीति से पीड़ित शरणार्थी मिर्सी अल्बा लोपेज (31) ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मेरा तीन साल का बेटा करीब चार महीने बाद मेरी गोद में आया, लेकिन वह मुझे पहचान नहीं पाया। कोर्ट में भी वह समाजसेवी महिला के पास जाने के लिए रोता रहा। इस दर्द से गुजर रहीं मिल्का पाब्लो (35) ने रोते हुए कहा कि मेरी तीन साल की बेटी अब मुझसे डरती है। मुझे देखकर दूर चली जाती है। प्रवासी मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि शरणार्थियों को संबंधित पुलिस विभाग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इतना ही नहीं शरणार्थियों को प्रशासन की तरफ से दी गई विशेष डिवाइस पहननी होगी। शरणार्थियों को यह डिवाइस पैर में पहननी होगी। इस डिवाइस से पुलिस शरणार्थियों की लोकेशन कभी भी ट्रेस कर सकेंगे।

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