नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी: देश में इंटरनेट के इस्तेमाल में नहीं होगा कोई भेदभाव

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दूरसंचार आयोग ने इंटरनेट के मामले में भेदभाव नहीं होने को लेकर (नेट न्यूट्रैलिटी) नियमों को मंजूरी दे दी है। ये नियम सेवा प्रदाताओं को इंटरनेट पर किसी सामग्री और सेवा के साथ किसी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाते हैं। हालांकि रिमोट सर्जरी और स्वचालित कर जैसी कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को नेट निरपेक्षता नियमों के दायरे से बाहर रखा जाएगा। दूरसंचार सचिव अरूणा सुंदरराजन ने कहा, ”दूरसंचार आयोग ने ट्राई की सिफारिशों के आधार पर नेट निरपेक्षता को मंजूरी दे दी। ऐसी संभावना है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सेवा प्रदाताओं के बीच ऐसे किसी प्रकार के समझौतों पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की है जिससे इंटरनेट पर सामग्री को लेकर भेदभाव हो। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए आयोग ने नई दूरसंचार नीति ‘राष्ट्रीय डिजिटल कम्युनिकेशंस पालिसी 2018’ को भी मंजूरी दे दी है। अरूणा ने कहा, ”बैठक में मौजूद सभी लोगों ने आज कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचा आज भौतिक बुनियादी ढांचे के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि जिलों के लिये हमें निश्चित रूप से डिजिटल बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना चाहिए। इसीलिए देश में कारोबार सुगमता और उपयुक्त नीति माहौल जरूरी है। बैठक में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार आयोग ने दिसंबर 2018 तक सभी ग्राम पंचायतों में 12.5 लाख वाईफाई हाट स्पाट लगाने को मंजूरी भी दी है। इसके लिये परियोजना को व्यवहारिक बनाने को लेकर करीब 6,000 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया जाएगा।

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