बिहारः शराबबंदी से नीतीश कैबिनेट का यूटर्न, मकान जब्ती और गिरफ्तारी जैसे मामलों में मिलेगी राहत

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सभी की निगाहें आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के बीच होने वाली मुलाकात पर टिकी हैं। क्योंकि संभावना है कि राजग नेताओं के बीच इस बैठक में 2019 के आम चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे पर सहमति बन जाएगी। दोनों नेता राज्य के अतिथि गृह में सुबह के नाश्ते पर मिलेंगे और फिर वे रात के भोजन के दौरान मुख्यमंत्री आवास में भी भेंट करेंगे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज (गुरुवार को) सुबह करीब 10 बजे पटना पहुंचेंगे और शुक्रवार को सुबह दिल्ली वापस लौट जाएंगे। इस दौरान वे विभिन्न बैठकों में भाग लेंगे। भाजपा और जदयू के सूत्रों का कहना है कि सीटों के बंटवारे पर भले ही विस्तृत चर्चा न हो, लेकिन आशा की जा रही है कि शाह और कुमार के बीच इस संबंध में मोटी-मोटी सहमति बन जाएगी। चार साल अलग रहने के बाद जदयू की राजग में वापसी के बाद शाह की यह पहली बिहार यात्रा है। हालांकि इन बैठकों में भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेन्द्र यादव, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और रवि शंकर प्रसाद सहित राज्य से आने वाले सभी केन्द्रीय मंत्री मौजूद होंगे। लेकिन सबकी निगाहें शाह और कुमार की बैठक पर रहेंगी।
वर्ष 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद शाह की यह पहली बिहार यात्रा है। हालांकि, तब और आज के समय में काफी बदलाव आ गया है। उस समय जद (यू) भाजपा से अलग महागठबंधन में था लेकिन अब भाजपा के साथ सरकार में है।
वैसे, इस दौरान आगामी चुनावों को लेकर भाजपा और जद (यू) के नेता सीट बंटवारे और बड़े भाई-छोटे भाई की भूमिका को लेकर आमने-सामने आते रहे हैं। दोनों दलों की बयानबाजी के दौरान जद (यू) ने यहां तक कह दिया था कि पिछले लोकसभा चुनाव के फॉमूलेर् पर चलते हुए उन्हें 40 में से 25 सीट लड़ने के लिए मिलनी चाहिए। जद (यू) ने यह भी कह दिया है कि अगर भाजपा नहीं मानती है, तो वह 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।’नीतीश कुमार ने हालांकि सोमवार को भी यह बात स्पष्ट कर दिया है कि जद (यू) और भाजपा के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता है। नीतीश ने यह भी कहा था कि दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर जो बयानबाजी हो रही थी वह बेमतलब है और जब चुनाव की तारीख पास आएगी, तो दोनों दलों के आला नेता बैठकर इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे और मामले का निपटारा कर लेंगेउल्लेखनीय है कि पिछले लोकसभा चुनाव में जद (यू) अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी और उसे मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था जबकि भाजपा को बिहार की 4० में से 22 सीटें मिली थीं। वहीं, सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को क्रमश: छह और तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर रालोसपा ने भी अधिक सीट पर दावेदारी कर रखी है। इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि सीट बंटवारा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल सभी दलों के जब दिल मिल गए हैं, तो सीट भी समय आने पर बंट जाएगा। इधर, विपक्ष भी शाह के दौरे पर पैनी नजर बनाए हुए है। गौरतलब है कि राजद रालोसपा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को कई मौके पर महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दे चुका है। राजग के घटक दलों में सीट बंटवारे को लेकर संभावित झगड़े को लेकर राजद, कांग्रेस के नेता उत्साहित हैं। राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भविष्यवाणी भी कर दी है कि लोजपा और रालोसपा दोनों महागठबंधन में शामिल होने वाले हैं। बातचीत हो चुकी है। हालांकि, रघुवंश के बयान को पासवान ने खारिज कर दिया है। ऐसे में तय है कि राजग में सीट बंटवारे के तय फॉमूर्ले से नाराज दल नए ठिकाने खोजेंगे।

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