मच्छरों से फैलने वाली बीमरियां इस साल रहेंगी चरम पर

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यूनीवर्सिटी ऑफ मेलबर्न में हुए अध्ययन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के लिहाज से यह साल काफी मुश्किल रहेगा। एक प्रयोग के लिए बनाई गई वीडियो क्लिप के आधार पर उन्होंने यह बात कही है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की 2018 की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साल मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों, जिसमें जीका वायरस, डेंगू, वेस्ट नाइल वायरस और मलेरिया शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरी नहीं कि इनसान को काटने वाले सारे मच्छर बीमारियों के वाहक हों। इसके बावजूद मच्छरों से बचने का उपाय करना बेहद जरूरी है। ऑस्ट्रेलियाई बायोलॉजिस्ट ने एक ब्रिटिश अखबार के साथ मिलकर मच्छरों से मुकाबले के लिए कुछ उपाय सुझाव दिए हैं। न्यू मेक्सिको स्टेट यूनीवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉक्टर इमो हैनसेन का कहना है कि बाजार में मौजूद जिन मच्छर मारने वाले स्प्रे या लिक्विड रिपेलेंट में डीईईटी कंपाउंड होता है, वह मच्छरों पर अधिक कारगर होते हैं। डॉ.हैनसेन ने बाजार में मौजूद मच्छरे मारने वाले स्प्रे पर 2015 में एक शोध किया था। उनका कहना है कि जिस ब्रांड का उत्पाद आप ले रहे हैं, उसके लेबल में डीईईटी का प्रतिशत देख लें। यह कंपाउंड अगर 25 फीसदी या उससे अधिक है तो यह 6 से 8 घंटे तक असरदार रहेगा। डीईईटी यानी डिथाइलटोल्युएमिड कीड़े मारने वाले उत्पाद में प्रमुखता से पाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना था कि यह रसायन कीड़ों या मच्छरों को इनसान के पसीने सांस की तरफ आकर्षित होने से रोकता है। यह दोनों के बीच एक तरह की दीवार का काम करता है। डॉ. हैनसेन का कहना है कि यूकेलिप्टस के पेड़ से मिलने वाला पदार्थ लेमन यूकेलिप्टस मच्छरों से बचाव में काफी कारगर होता है। इसमें मौजूद तत्व पीएमडी मच्छरों को प्राकृतिक तरीके से दूर भगाने में मदद करता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे तीन साल से कम उम्र के बच्चों की त्वचा पर सीधे इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं।
मच्छरों की समस्या इतनी बढ़ गई है कि इनसे बचाव के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। बाजार में मच्छरों से बचाने वाले कुछ गैजेट्स भी उपलब्ध हैं, जो आपकी मदद करने का दावा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपकरण आवाज की तकनीक पर काम करते हैं।
यह ऐसी ध्वनि तरंगे छोड़ते हैं, जिन्हें इनसान नहीं सुन सकते हैं, मगर असल में यह मच्छरों को आकर्षित करते हैं। इसी तरह कुछ प्राकृतिक तेलों वाले ब्रेसलेट भी बाजार में उपलब्ध हैं। इनसे अच्छी खुशबू आने के अलावा और कोई मदद नहीं मिलती है। क्लीवलैंड क्लीनिक में फैमिली मेडिसिन की विशेषेज्ञ डॉ. नेहा व्यास कसी बुनाई वाले कपड़े पहनने की सलाह देती हैं। अगर आप मच्छरों के प्रकोप वाले क्षेत्र में रहते हैं तो ज्यादा जालीदार कपड़ों से परजे करना चाहिए। वैसे तो मच्छर रंगों से ज्यादा इनसान के शरीर से आने वाली गंध की ओर आकर्षित होते हैं। मगर यह भी देखा गया है कि वह गहरे रंगों की ओर ज्यादा खिंचते हैं। इसमें जींस, लेगिंग और अन्य तरह के काले कपड़े। डॉ. व्यास का कहना है कि सफेद, बादामी या खाकी पहनने वाले लोगों को मच्छर कम परेशान करते हैं। आधी या बिना बाजु के कपड़ों की जगह पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना भी अच्छा रहता है।

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