रेलवे स्टेशनों पर इस्तेमाल हो चुकीं प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर नहीं बेचा जा सकेगा

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पीने के पानी की बोतल के इस्तेमाल होने के बाद पुन: उसकी रीफिलिंग कर रेलयात्रियों को बेचने के गोरखधंधे पर लगाम लगने जा रही है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल पीसने (क्रशिंग) की मशीन लगाने का फैसला किया है। इससे स्टेशनों पर सफाई रहेगी, पुरानी बोतलों का पुन: इस्तेमाल नहीं हो सकेगा और यात्रियों को शुद्ध पेयजल मिलने की गारंटी रहेगी। रेलवे बोर्ड ने 4 जुलाई को रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम राइट्स को प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन (पीबीसीएम) लगाने के लिए कंसल्टेंट तलाश करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कंपनियां रेलवे स्टेशनों पर क्रशिंग मशीन प्लांट स्थापना के साथ प्लांट में बोतलों की आपूर्ति, परिचालन और रख-रखाव का प्रबंधन कर सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में इस्तेमाल प्लास्टिक की बोतलों का निष्पादन मैन्युअल किया जाता है। लेकिन मशीनें लगाने से यह काम आसान और सस्ते में हो जाएगा। रेलवे ने प्रथम चरण में देशभर के 16 जोन और 70 डिवीजन में दो हजार प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पीबीसीएम लगाने का फैसला किया है। प्लांट लगाने का ठेका आठ साल के लिए दिया जाएगा। योजना को सफल बनाने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि क्रशिंग मशीन लगाने से इ्रस्तोल की गई पानी की बोतल को रीफिल कर पुन: यात्रियों को बेचने की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। अभी यात्री बोतलबंद के पूरे पैसे देने के बावजूद अशद्ध पानी पीने को विवश हैं। इससे पर्यावरण बचाने में सहायता मिलेगी। रेलवे में सालाना 100 करोड़ से अधिक बोतलबंद पेयजल की बिक्री होती है। इसमें रेल नीर महज 6.2 लाख बोतल प्रतिदिन आपूर्ति किया जाता है। शेष 35 लाख प्रतिदिन बोतलबंद पेयजल दूसरी कंपनियां आपूर्ति करती हैं। इसके अलावा स्टेशनों पर प्लास्टिक की बोतल वाली कोल्ड ड्रिंक की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है।

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