नौनिहालों को शिक्षादान तो बड़ों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे छह दोस्त, जानिए

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ह दोस्त मिलकर जहां स्लम बस्ती के बच्चों को पीपल के पेड़ के नीचे पढ़ा रहे हैं तो वहीं बड़ों को स्वच्छता के बारे में भी बता रहे हैं। इन्होंने समाज को बदलने का बीड़ा उठाया है।
मुजफ्फरपुर ।भिखनपुरा गांव की स्लम बस्ती में पीपल के पेड़ के नीचे ट्रेनों की आवाज के बीच सजती है अनोखी पाठशाला। इसमें बच्चों को शिक्षा देने के साथ बड़ों को सफाई का पाठ पढ़ाते हैं छह दोस्त। खुद छात्र होने के बाद भी सप्ताह में तीन दिन दो घंटे इनकी क्लास चलती है। एक साल पहले छात्रों ने इस अभियान की शुरुआत की थी। ललित नारायण तिरहुत कॉलेज से बीकॉम कर रहे राहुल कुमार, ट्विंकल कुमारी व प्रिया आनंद वर्ष 2017 में स्वच्छ भारत समर इंटर्नशिप के दौरान कॉलेज की टीम के साथ भिखनपुरा गांव गए। इस दौरान देखा कि स्लम बस्ती के बच्चे पढऩे की जगह दिनभर घूमते हैं। वहां सामुदायिक भवन में एक प्राथमिक विद्यालय तो है, लेकिन शिक्षक नियमित नहीं आते। यहीं इनके मन में विचार आया कि इन बच्चों को पढ़ाया जाए। इंटर्नशिप खत्म होने के बाद जुलाई से बच्चों के लिए क्लास लगानी शुरू कर दी। शुरुआत में कुछ बच्चे आए, फिर संख्या बढऩे लगी। कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चे 40 बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। हाल ही में पढ़ाने वाले छात्रों की टीम में बीए कर रहे सोनू कुमार व स्वाति कुमारी तथा इंटर कर रहे रंजन कुमार भी जुड़ गए हैं। इनके नेक काम को देखते हुए प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर ने अपने यहां जगह दे दी है, ताकि तेज धूप या बारिश में वहां पढ़ाई हो सके। ये छात्र जेब खर्च से कॉपी, पेंसिल, रबर व पेन बच्चों को उपलब्ध कराते हैं। प्रत्येक रविवार को विशेष क्लास लगती है, जिसमें निबंध, क्विज, पेंटिंग, गीत-संगीत सहित अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। ये छात्र बस्ती में पर्व-त्योहार मनाने के साथ ही बच्चों का जन्मदिन भी मनाते हैं। राहुल ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर सफाई की जाती है। चंदा एकत्रित कर स्कूल के पास सामुदायिक शौचालय का निर्माण भी करा रहे हैं। बस्ती की मिंटू देवी, शर्मिला देवी और माला देवी कहती हैं कि इन छात्रों के आने से बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगा है। उन्हें भी शिक्षा और सफाई का महत्व समझ में आ गया है।रेखा देवी, शांति, नीलम और गीता कहती हैं कि बच्चे जब किताब लेकर कुछ पूछने आते हैं तो नहीं पढऩे का मलाल होता है। बच्चों को देख इस उम्र में हमें भी पढऩे की इच्छा होने लगी है। जिला शिक्षा अधिकारी ललन प्रसाद सिंह का कहना है कि इन छात्रों की तरह अन्य युवा भी इसी तरह आगे आएं तो अशिक्षा का कलंक खत्म हो सकता है।

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