FIFA WC 2018: क्रोएशिया के कप्तान की अनोखी कहानी, बम धमाकों और गोलीबारी के बीच बने फुटबॉलर

0
58

क्रोएशियाई फुटबॉल टीम के कप्तान लुका मोड्रिक ने अपने जबरदस्त खेल और करिश्माई नेतृत्व के दम पर अपनी टीम को पहली बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचा दिया है। 15 जुलाई को क्रोएशिया और फ्रांस की टीमें मॉस्को के लुज्निकी स्टेडियम में 21वें फुटबॉल विश्व कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के लिए एक दूसरे से भिड़ेंगी। उससे पहले हम आपको क्रोएशियाई कप्तान लुका के जीवन के उस कठिन सफर के बारे में बता रहे हैं, ​जिसका उन्होंने प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने से पहले सामना किया। लुका मोड्रिक क्रोएशिया के जिस शहर में बड़े हो रहे थे वह गृह युद्ध का दंश झेल रहा था। जब वह सिर्फ 6 साल के थे, तो उनके दादा जी की चरमपंथियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। लुका मोड्रिक को 6 साल की छोटी उम्र में ही शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा। लेकिन, इस कठिनाई भरे बचपन के बावजूद लुका ने हार नहीं मानी और फुटबॉल की दुनिया के बड़े नाम बनकर उभरे। आज 32 साल की उम्र में लुका मोड्रिक फुटबॉल के ग्लोबल सुपरस्टार बन चुके हैं।बाल्कन युद्ध अपने चरम पर था, सर्बिया के हिंसक चरमपंथियों ने मोड्रिकी शहर में कत्लेआम मचा रखा था। 8 दिसंबर , 1991 के दिन लुका मोड्रिक के दादा भी इन चरमपंथियों की गोलीबारी के शिकार बने। सुनसान सड़क पर वह अपने जानवरों के साथ जा रहे थे, उनके साथ पांच और स्थानीय लोग थे। चरमपंथियों ने लुका मोड्रिक ​सीनियर के साथ ही उन पांच लोगों को भी गोलियों से भून दिया। कत्लेआम मचाने वालों का मोड्रिका के निवासियों को संदेश साफ था कि वे अपना घर छोड़कर कहीं और चले जाएं या अपनी जान गंवाऐं। लुका मोड्रिक को उनके दादा की मौत से गहरा आघात पहुंचा। लुका को अपने दादा जी से खास लगाव था। क्योंकि उनके माता-पिता घर से दूर एक कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे और लुका मोड्रिक अपने दादा जी के साथ ही रहते थे। इस घटना के बाद लुका और उनके माता-पिता को मोड्रिकी शहर छोड़ना पड़ा और जदार शहर में शरणार्थी बनकर रहना पड़ा। शरणार्थी शिविर में बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं थी। लुका को गोलियों की तड़तड़ाहट और लैंडमाइंस के धमाकों के बीच अपना बचपन काटना पड़ रहा था। लेकिन इस भयावह परिदृश्य के बीच भी 6 साल के लुका बिना हवा वाली एक फुटबॉल के साथ शरणार्थी शिविर में ही खेला करते थे। इस उम्मीद के साथ कि एक दिव वह इस बुरे दौर को पीछे छोड़कर शांत और प्रसन्नता की जिंदगी जिएंगे। मोड्रिक अपने बचपन की कठिनाईयों के बारे में कभी चर्चा नहीं करते, लेकिन जब उन्होंने साल 2008 में टॉटेंहम हॉटस्पर फुटबॉल क्लब के साथ जब करार किया था तो अपनी निजी जिंदगी के बारे में ये बातें बताई थीं। लुका मोड्रिक अपने बचपन के बारे में बात करते हुए कहते हैं, ‘जब युद्ध शुरू हुआ तो हम शरणार्थी बन गए। वह निश्चित रूप से बहुत कठीन समय था। मैं 6 साल का था, मेरे जेहन में उन कठिन दिनों की धुंधली यादें आज भी ताजा हैं। लेकिन, मैं उन्हें याद नहीं करना चाहता। हमें कई सालों तक एक होटेल में रहना पड़ा, पैसों की तंगी थी। लेकिन मैंने फुटबॉल से हमेशा प्यार किया। मुझे याद है कि मेरे पहले ‘शिन पैड’ पर ब्राजील के सटार रोनाल्डो की तस्वीर थी। युद्ध ने मुझे मजबूत बनाया। मेरे और मेरे परिवार के लिए वह काफी कठिन समय था। मैं उन यादों को अपने साथ नहीं रखना चाहता, लेकिन मैं उन्हें भूलना भी नहीं चाहता।’लुका मोड्रिक जब 10 साल के थे तो उनको कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। मोड्रिक को कई कोचों ने उनके शर्मिले व्यवहार और पतले-दुबले शरीर के कारण फुटबॉल खेलने के लायक ना मानते हुए कोचिंग देने से मना कर दिया था। तोमिस्लाव बेसिक वह कोच थे जिनकी वजह से लुका मोड्रिक को क्रो​एशिया के फुटबॉल क्लब हैजडक स्प्लिट ने पहला मौका दिया। इसके बाद से उनकी प्रतिभा निखर कर सामने आई। उसके बाद टॉटेंहम हॉटस्पर और रियल मैड्रिड ने उनके साथ करार किया और लुका मोड्रिक फुटबॉल की दुनिया के एक बड़े नाम बन गए। लुका मोड्रिक ने साल 2010 में वैंजा बोस्निक से शादी की। इन दोनों का एक बेटा और दो बेटियां हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here