खुलासा: दिल्ली में धोखे से बेची जा रहीं आदिवासी किशोरियां, झारखंड में लापता हैं 3300 लड़कि

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राजधानी में घरों में काम करने के लिए रखी जाने वाली आदिवासी किशोरियां ‘अपनों’ की ठगी का ही शिकार बन रही हैं। इन किशोरियों को उनकी जान पहचान के लोग अच्छे वेतन का लालच देकर बहला फुसलाकर दिल्ली ले आते हैं और फिर उन्हें प्लेसमेंट एजेंसियों के हाथ बेचकर फरार हो जाते हैं। यह खुलासा समय-समय पर पुलिस एवं गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से छुड़ाई जाने वाली इन किशोरियों से हुई पूछताछ में हुआ है।

दरअसल, दिल्ली में घरों में काम करने के लिए सस्ते श्रम के रूप में आदिवासी किशोरियों को रखा जाता है। दिल्ली पुलिस द्वारा छुड़ाई गई अधिकांश किशोरियां झारखंड, बंगाल, ओडिशा और असम के पिछड़े एवं साधनहीन इलाकों से लाई गई होती हैं। इसमें बहुत सी किशोरियों को तो अपने घर का पता तक भी नहीं मालूम होता है।

सूत्रों के अनुसार, प्लेसमेंट एजेंसियों ने दूरदराज के इलाकों में स्थानीय पुरुषों एवं महिलाओं को दलाल बना रखा है। ये लोग गरीब एवं मजबूर परिवारों पर नजर रखे रहते हैं। फिर ‘शिकार’ को बहला फुसलाकर दिल्ली लाते हैं और प्लेसमेंट एजेंसियों को 40 से 50 हजार रुपये में बेच देते हैं। इस बात का अंदाजा न तो किशोरियों और न ही उनके परिवार को होता। जब रुपये नहीं आते और न ही किशोरी का पता चलता है तो परिवार दलालों को ढूंढ़ता है।

ऐसे फैला है जाल
दिल्ली में मौजूद प्लेसमेंट एजेंसियों के दूरदराज के इलाकों में फैले एजेंट किशोरियों को कभी सीधे या फिर दो तीन अन्य मध्यस्थों से होते हुए प्लेसमेंट एजेंसियों तक पहुंचाते हैं। कुछ प्लेसमेंट एजेंसियां दूसरी एजेंसियों को इन किशोरियों को बेच भी देतीं हैं। एक आंकड़े के अनुसार 3300 से अधिक किशोरियां सिर्फ झारखंड से लापता हैं जिनका अभी तक कोई पता नहीं चला है। दिल्ली के शकूरपुर, महरौली, साउथएक्स, पंजाबी बाग और लाजपतनगर में बड़ी संख्या में प्लेसमेंट एजेंसियां मौजूद हैं। इसमें अधिकांश अवैध तरीके से संचालित होती हैं। पंजाबी बाग पुलिस ने शनिवार को पीतमपुरा इलाके से 19 साल की युवती को बरामद किया है। युवती के परिजनों ने वर्ष 2015 में झारखंड के सिमडेगा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह युवती 12 साल पहले सिमडेगा से सात वर्ष की उम्र में दिल्ली लाई गई थी। इसके बाद उससे दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों के घरों में काम कराया गया। शक्ति वाहिनी नाम की गैर सरकारी संस्था के सहयोग से दिल्ली एवं झारखंड पुलिस ने युवती को मुक्त कराया। देह व्यापार के धंधे से छुड़ाई गईं कुछ किशोरियों ने बताया कि उन्हें शादी करने का झांसा देकर दिल्ली लाया गया था। बाद में उन्हें देहव्यापार में धकेल दिया गया। अधिकांश मामलों में लड़कियों ने बताया कि उन्हें राहुल नाम के लड़के ने यहां बेचा है। लेकिन, पुलिस के पास राहुल नाम के लड़के का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दिसंबर 2016 में मुखर्जी नगर इलाके में अतुल लोहिया नाम के व्यक्ति ने 16 साल की अपनी नौकरानी लूसी को काम करने से मना करने पर इतना पीटा कि एक हफ्ते अस्पताल में भर्ती रहने के बाद किशोरी ने दम तोड़ दिया था। किशोरी को तीन साल पहले पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले से लाया गया था। उसे मरियम नाम की स्थानीय महिला दिल्ली लेकर आई थी। मियांवाली नगर इलाके में 14 मई को पुलिस को दस टुकड़ों में झारखंड निवासी सोनी कुमारी की लाश मिली थी। किशोरी तीन वर्ष पहले पड़ोसी मंजीत करकेटा के साथ दिल्ली आई थी। पुलिस के हत्थे चढ़े मंजीत ने पूछताछ में बताया था कि वह सोनी का वेतन खुद हड़प जाता था। जब सोनी ने वेतन लेने की जिद की तो कुल्हाड़ी से काटकर उसका शव नाले में फेंक दिया था।

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