राहुल के ‘मैं कांग्रेस हूं’ ट्वीट पर BJP का पलटवार- जिन्नावादी सोच देश को नहीं बढ़ने देगी

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भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘मैं कांग्रेस हूं’ वाले ट्वीट को कांग्रेस के मुस्लिम परस्त पार्टी होने संबंधी उनके कथित बयान की स्वीकारोक्ति बताया है और कहा कि उनकी जिन्नावादी विचारधारा देश को आगे नहीं बढ़ने देगी। भाजपा के प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तीन दिनों से देश की जनता राहुल गांधी से उनकी तथाकथित मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक और एक उर्दू अखबार की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के मुस्लिमों की पार्टी होने के बयान के बाद कुछ सवाल पूछ रही थी। जनता पूछ रही थी कि क्या कांग्रेस देश को बांटने वाली और तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है। यह भी पूछा है कि क्या आपने यह कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है या नहीं कहा था?

उन्होंने कहा कि एक दिन कांग्रेस चुप रहती है और दूसरे दिन कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के नेता नदीम जावेद कहते हैं कि ना तो राहुल गांधी ने कुछ गलत कहा है और ना ही उर्दू अखबार ने गलत लिखा है। आज राहुल गांधी ने चार पांच पंक्तियों का एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहीं पर भी खंडन नहीं किया है। यदि खंडन नहीं है तो इसे स्वीकारोक्ति कहा जाएगा। इसका मतलब राहुल गांधी का कहना है कि जो भी उन्होंने कहा था, वह उस पर कायम हैं। साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह कांग्रेस का सब सोचा-समझा षड़यंत्र है। वह संदेश को पहले गुपचुप मीडिया में लीक कराती है। बैठक बंद कमरे में होती है। बाद में उर्दू अखबार को खबर दे दी जाती है। कांग्रेस पहले कहती है कि अखबार को नोटिस देगी लेकिन अगले दिन उसके नेता नदीम जावेद पुष्टि कर देते हैं। डॉ. पात्रा ने कहा कि इसके उजागर होने से देश के सेकुलर ताने बाने को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहुल गांधी ने रफू करने का प्रयास किया है और ‘विराटस्वरूप’ धारण करके ट्वीट किया, ‘मैं पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के साथ हूं। शोषित, उपेक्षित तथा सताए हुए लोगों के साथ। मेरे लिए उनका धर्म, जाति या विश्वास ज्यादा महत्व नहीं रखते। मैं घृणा और भय को मिटाती हूं। मैं सबसे प्यार करती हूं। मैं कांग्रेस हूं।’उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का ट्वीट सबको भ्रम में डालने वाला है। उन्होंने जनता के सवालों को सुलझाने की बजाय दरअसल अपने कथित बयान को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि गांधी केवल एक ही चीज से प्यार करते हैं, वह है निर्जिव कुर्सी। उन्हें सजीव मनुष्य से प्यार नहीं है। वह अपने संदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को अपनाने की बात कह रहे हैं। लेकिन वह नहीं जानते कि अंतिम पंक्ति का अंतिम व्यक्ति कांग्रेस के साथ नहीं है। कांग्रेस ने उस अंतिम व्यक्ति के साथ फरेब किया है।

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