सुप्रीम कोर्ट ने की मॉब लिंचिंग की आलोचना, कहा-‘भीड़ को हिंसा की इजाजत नहीं, कानून बनाए संसद’

0
218

देशभर में गौरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हिंसा (मॉब लिंचिंग) के मामले में दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत ने केन्द्र सरकार से कानून बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती है, ऐसे में मॉब लिंचिंग पर केन्द्र सरकार को कानून बनाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि किसी भी नागरिक को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही, सर्वोच्च अदालत ने केन्द्र और राज्य सरकार से ऐसी हिंसा पर लगाम लगाने के लिए चार हफ्ते में गाइडलाइंस जारी करने को कहा है। देश में हाल में हुई कई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के देखते हुए गोरक्षकों की तरफ से पिटाई किए जाने को लेकर लगाई गई कई याचिकों पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा- “अव्यवस्था और डर के माहौर में राज्य को सकारात्मक रूप से काम करना चाहिए।” इससे पहले इस मामले पर 3 जुलाई को हुई अंतिम सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि यह कानून का मामला है और इस पर रोक लगाना हर राज्य की जिम्मेदारी है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि मॉब लिन्चिंग की घटनाओं को हर हाल में रोका जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा मसला नहीं है, बल्कि यह एक अपराध है, जिसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने आगे कहा था कि कोर्ट को यह मंजूर नहीं कि देश में कोई भी कानून को अपने हाथ में ले। गौरतलब है कि गोरक्षा के नाम पर भीड़ की हिंसा के मामले में स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं होने के कारण अभी तक पुलिस कार्रवाई में दिक्कत आ रही थी, जिससे दोषियों को बच निकलने में आसानी होती थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.