गन्ना किसानों को राहत: एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 275 हुआ

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गन्ना किसानों को मोदी सरकार ने तोहफा दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 20 रुपये बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
सरकार आगामी पेराई सीजन 2018-19 के लिए गन्ना का एफआरपी 275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह अक्तूबर से शुरू होगा। इस सीजन में गन्ना का एफआरपी 255 रुपये प्रति क्विंटल है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने अगामी पेराई सीजन के लिए रिकवरी दर को भी 9.5 फीसदी के बढ़ाकर दस प्रतिशत कर दिया है।
बुआई बढ़ी
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा सीजन में गन्ना की बुआई बढ़ी है। करीब 50.52 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है। जबकि पिछले साल गन्ना की बुआई 49.72 लाख हेक्टेयर में हुई थी। ऐसे में आगामी पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में भी वृद्धि होगी। इस साल चीनी का उत्पादन 321 लाख टन से अधिक है। बुआई का क्षेत्र बढ़ने से आगामी पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 355 लाख टन होने का अनुमान है।
चीनी का न्यूनतम मूल्य
ऐसे में एफआरपी में वृद्धि के साथ सरकार की गन्ना किसानों के बकाया के भुगतान पर भी नजर है। उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य की भी समीक्षा कर रही है। पिछले माह सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपये प्रति किलो तय किया था। ऐसे में न्यूनतम बिक्री मूल्य में भी वृद्धि की जा सकती है। ताकि किसानों को गन्ना का दाम मिलने में कोई देरी नहीं हो। अभी किसानों के चीनी मिलों पर करीब 19 हजार करोड़ रुपये बकाया है।
मूल्य तय करने का तरीका
केंद्र सरकार गन्ना का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में मिल एफआरपी देती है। जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में प्रदेश सरकार राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) तय करती है। एसएपी अमूमन एफआरपी से अधिक होता है।
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जून को गन्ना किसानों से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि सरकार जल्द गन्ना का एफआरपी घोषित कर देगी।

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