पुराने विमानों को हटाने में देरी से बढ़े हादसे, 8 साल में 45 मिग क्रैश

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पुराने पड़ चुके मिग विमान लगातार हादसों के शिकार हो रहे हैं। इन विमानों को वायुसेना से हटाने की प्रक्रिया में हो रही देरी भी इसके लिए जिम्मेदार है। पहले इन विमानों को 2015 तक हटाने की योजना थी लेकिन नए विमानों के अधिग्रहण में देरी के कारण यह अवधि 2017 की गई। लेकिन अभी भी डेढ़ सौ से अधिक विमानों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना कर रही है। जो 40-50 साल पुराने हैं वायुसेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार इनमें से काफी विमान हैं जिन्हें बीच-बीच में अपग्रेड किया गया है। लेकिन यह कार्य हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने अपने संसाधनों से किया है। इसके लिए उपयुक्त कलपुर्जों की प्राप्ति रूस से नहीं हो रही है। इसलिए अपग्रेड करना भी ज्यादा प्रभावी नहीं हुआ है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2007-15 के बीच वायुसेना के कुल 93 विमान हादसे के शिकार हुए जिनमें 45 मिग विमान थे। इनमें मिग-21, मिग-27 तथा मिग-29 शामिल हैं। हर विमान हादसे के बाद कोर्ट ऑफ इंक्वारी होती है। जिसमें पता चला है कि हादसे के शिकार 45 मिग विमानों में से 27 विमान तकनीकी खामियों के कारण हादसे के शिकार हुए जबकि 18 हादसे अन्य कारणों से हुए। बता दें कि 23 फरवरी 2011 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए. के. एंटोनी ने संसद में कहा था कि 2017 तक मिग विमानों को वायुसेना से हटा लिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए बाकायदा कार्य योजना बनाई जा चुकी है। हाल में संसदीय समिति ने इस मिग विमानों को हटाने में देरी पर चिंता व्यक्त की थी। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मिग विमानों को हटाने में देरी की वजह नए विमानों का अधिग्रहण नहीं हो पाना है। यूपीए सरकार में 126 लड़ाकू विमानों की खरीद लंबे समय तक अधर में लटकी रही। बाद में एनडीए सरकार आने पर 36 राफेल विमान खरीदे गए लेकिन उनकी आपूर्ति होने में अभी समय है। तीसरे, मिग की जगह लेने के लिए स्वदेशी तेजस के निर्माण में भी विलंब हुआ। तेजस का लड़ाकू संस्करण अभी भी तैयार नहीं है। तीसरे, मिग की जगह लेने के लिए सुखोई एमकेआई विमानों की आपूर्ति में भी विलंब हुआ। इनके चलते वायुसेना मिग विमानों को ढो रही है।
विमानों की कमी
वायुसेना को चीन और पाकिस्तान की चुनौती से निपटने के लिए लड़ाकू विमानों की 45 स्कवाड्रन की जरूरत है। एक स्वाड्रन में करीब 18 लड़ाकू विमान होते हैं। लेकिन अभी सिर्फ 36 स्क्वाड्रन ही वायुसेना के पास हैं। इनमें भी करीब आठ स्क्वाड्रन मिग श्रेणी के विमानों की है। यदि इन्हें हटाया गया तो वायुसेना की आठ स्क्वाड्रन कम हो जाएंगी।
चार सालों में 26 विमान हादसे की भेंट चढ़े
बुधवार को संसद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 2015 से अब तक वायुसेना के 25 विमान हादसे के शिकार हुए हैं। बुधवार को हुए हादसे को जोड़ लें तो यह संख्या 26 पहुंच जाती है।

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