मानसून सत्र LIVE: मोदी सरकार के खिलाफ वोट नहीं करेगी शिवसेना

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संसद में आज मानसून सत्र का तीसरा दिन है। मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की लड़ाई होगी। संख्या बल में भारी सरकार ज्यादा से ज्यादा समर्थन जुटाकर विपक्ष की मुहिम को ध्वस्त करने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष असंतुष्ट दलों का साथ लेकर सरकार को हराने के लिए कमर कस चुका है। यह लड़ाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों यहां के आंकड़ों और मुद्दों को लेकर मिशन-2019 पर निकलेंगे। 9:40 AM- सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला मुख्य दल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) आज शुक्रवार को लोकसभा में इस पर चर्चा की शुरुआत करेगा और अध्यक्ष ने उसे बोलने के लिए 13 मिनट का समय दिया है। पार्टी की ओर से जयदेव गल्ला पहले वक्ता होंगे। 9:30 AM- मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है। कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और सदन में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस पर बोल सकते हैं। 8:30 AM- पीएम मोदी ने किया ट्विट-आज हमारे संसदीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण दिन है। मुझे यकीन है कि मेरे साथी सांसद सहयोगी इस अवसर पर उभरेंगे और एक रचनात्मक, व्यापक और व्यवधान मुक्त बहस सुनिश्चित करेंगे। हम लोगों और हमारे संविधान के निर्माताओं को इसका श्रेय देते हैं। भारत हमें बारीकी से देखेगा। मोदी सरकार के खिलाफ आए पहले अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को मतविभाजन होगा। इसमें गैर भाजपा-कांग्रेस दलों का रुख अहम होगा। तो जानते हैं अब तक इनकी ओर से आ रहे संकेत। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी ने गुरुवार को संकेत दिया कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में विपक्ष का साथ नहीं देगी। उन्होंने कहा, अविश्वास प्रस्ताव टीडीपी आंध्रप्रदेश के मुद्दे को लेकर आई है। अन्नाद्रमुक ने जब कावेरी जल विवाद को लेकर संसद में अपनी बात रखी, तो किसी भी दल ने उसका साथ नहीं दिया। न ही इस मुद्दे पर तमिलनाडु के समर्थन में कोई अन्य राज्य आया। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि पलानीसामी और राज्य के उप मुख्यमंत्री ओपी पनीरसेल्वम ने समय देने के बावजूद टीडीपी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की थी। बीजू जनता दल के संसदीय बोर्ड की बैठक गुरुवार को संसद भवन में हुई। लेकिन दो घंटे तक हुई चर्चा के बावजूद अविश्वास प्रस्ताव पर एकराय नहीं बन सकी और अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक पर छोड़ दिया गया। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि बीजद की नीति कांग्रेस और भाजपा से बराबर दूरी की रही है। इसलिए पार्टी मतविभाजन के वक्त सदन से अनुपस्थित रह सकती है। बता दें कि बीजद मार्च महीने में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से आयोजित रात्रि भोज में भी शामिल नहीं हुई थी। न ही पार्टी ने मई में एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में अपना कोई प्रतिनिधि भेजा था अविश्वास प्रस्ताव का टीडीपी की ओर से पेश करने से तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के समक्ष धर्मसंकट पैदा हो गया है। टीआरएस प्रमुख भले ही प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर हमले करते रहे हों, लेकिन वह तेलंगाना गठन के विरोधी टीडीपी के साथ भी दिखाई नहीं देना चाहते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके सांसद अविश्वास प्रस्ताव से दूर रही रहेंगे। तृणमूल कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है। साथ ही अपने सांसदों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी करेगी। पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, बड़े हित और विपक्ष की एकता के लिए उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया। हालांकि, साथ ही माना कि सरकार को सदन में बहुमत है। उन्होंने कहा, भले सरकार को संसद में समर्थन हो, लेकिन बाहर नहीं। आम अदमी पार्टी ने टीडीपी की ओर से पेश अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की है। टीडीपी का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिला, जिसके बाद पार्टी ने प्रस्ताव के पक्ष में मत देने का फैसला किया।

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