अविश्वास प्रस्ताव: राहुल गांधी ने खुद को बताया शिवभक्त, हंगामे के बावजूद भी नहीं खोई लय

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लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोलते हुए सरकार पर सीधा हमला किया और कहा कि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही। उन्होंने, राफेल विमान सौदे, किसानों की स्थिति, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। राहुल ने कहा कि पूरा विपक्ष और सत्तापक्ष के कई लोग मिलकर सरकार को हराएंगे। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री के शब्द का मतलब होना चाहिए। पर सरकार अपने वादे पूरे करने में पूरी तरह विफल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने राफेल विमान सौदे पर सवाल उठाते हुए कहा, यूपीए सरकार ने 520 करोड़ रुपये में एक विमान का सौदा किया था। पर एनडीए के समय विमान की कीमत 1600 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। यहां तक कि इन विमानों तक एसेंबल करने की जिम्मेदारी एचएएल के बजाय निजी कंपनी को दी गई।
भाजपा के लिए पप्पू हूं
राहुल ने भाषण के दौरान कहा कि वह भाजपा के लिए पप्पू हो सकते हैं। पर उनके दिल में सभी के लिए हमेशा प्यार रहेगा। वह इसी तरह उनसे प्यार करते रहेंगे और कांग्रेस की तरफ लाने की कोशिश करता रहूंगा। हम सब मिलकर हराएंगे।
खुद को बताया शिवभक्त
अपने भाषण के दौरान राहुल ने कांग्रेस पर मुस्लिम पार्टी होने के आरोपों को भी धोने की कोशिश की। पहली बार सार्वजनिक तौर पर खुद को भगवान शिव का भक्त होने का खुलासा करते हुए उन्होंने खुद को असली हिंदू साबित करने की भी भरपूर कोशिश की। इसलिए, वह यह कहने में नहीं चूके कि भाजपा के लिए वह पप्पू हैं, पर उनके दिल में कोई नाराजगी नहीं है। हिंदू होने का मतलब यही होता है।
आत्मविश्वास से लबरेज दिखे
कांग्रेस अध्यक्ष के भाषण से साफ जाहिर है कि उनका आत्मिवश्वास बढ़ रहा है। इसिलए प्रधानमंत्री की मौजूदगी में उन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने खुद को लेकर लोगों खासकर अपनी पार्टी में उम्मीद जगाई है। भाषण के दौरान राहुल ने यह संकेत देने की भी कोशिश की कि वह ही लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर सकते हैं। भाजपा और उनके आलोचक यह कहते रहे हैं कि राहुल आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
हंगामे के बावजूद नहीं खोई लय
पूरे भाषण के दौरान राहुल की बाडी लैंग्वेज से साफ था कि वह पूरी तैयारी के साथ आए हैं। इसलिए, सत्तापक्ष के हंगामे के बावजूद उन्होनें अपनी लय नहीं खोई। उन्होंने किसान, बेरोजगारी, दलित, छोटे उद्योग और महिलाओं से जुड़े मुद्दे उठाकर एक बड़े वर्ग को संबोधित करने की कोशिश की है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इसी वर्ग पर खास ध्यान देगी। इसके साथ भ्रष्टाचार को लेकर भी सीधा हमला किया।
प्रधानमंत्री से गले मिल दिया संदेश
भाषण के अंत में अचानक अपनी सीट से उठकर प्रधानमंत्री के पास जाना और उनसे गले मिलकर वह यह संदेश देने में सफल रहे। मोदी से उनका वैचारिक मतभेद है, व्यक्तिगत नहीं। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलिंपग सोसाइटी (सीएसडीएस) के निदेशक संजय कुमार कहते हैं कि राहुल एक परिपक्व नेता के तौर अपनी छवि बनाने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा, राहुल के भाषण में कंटेट और शैली दोनो थी। प्रधानमंत्री से गले मिलना उनकी विन्रमता को दिखाता है। इससे साफ है कि उनका सरकार की नीतियों से विरोध है। विपक्ष होने के नेता वह उन्हें उठा रहे हैं। पर व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी से उनका कोई विरोध नहीं है। यह अंदाज उन्हें और बड़ा बनाता है।

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